सचिव भागचंद के बिगड़े बोल— “हम नहीं जानते किसी सरकार को!”
रांकई के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) फॉर्म मामले में जो वीडियो सामने आए हैं, वह सिर्फ फॉर्मों की गड़बड़ी नहीं बता रहे—बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की अंतर्विरुद्ध और खोखली रीढ़ का खुलासा कर रहे हैं।
🔴 खुला चैलेंज — “हम नहीं जानते किसी सरकार को!”
जब सचिव भागचंद जैसी पदस्थ व्यक्ति कैमरे पर कह दे कि “हम नहीं जानते किसी सरकार को!”, तो यह सिर्फ बात नहीं—यह चेतावनी है। यह दर्शाता है कि कुछ अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए खुद को किसी तरह की जवाबदेही से ऊपर समझने लगे हैं।क्या यही है शासन-प्रशासन का आत्मसम्मान?
क्या यही है वह पंचायत व्यवस्था जिस पर जनता भरोसा करती है?
जिस जिले से खुद पंचायत मंत्री आते हों, उसी जिले की पंचायत में इस तरह की खुली मनमानी?क्या यह सिर्फ संयोग है या लापरवाही की सुनियोजित परंपरा?
और सबसे बड़ा सवाल—
जब मीडिया ने अनियमितता का वीडियो सामने लाया, तब एक बीएलओ के मुंह से जनप्रतिनिधि के लिए अपशब्द निकलना क्या दर्शाता है?
सिस्टम की गिर चुकी नैतिकता?या जवाबदेही से भागने की बेशर्म कोशिश?ऐसा लगता है जैसे इन कर्मचारियों ने
“सरकार हमसे डरती है”
वाला भ्रम पाल लिया हो। वरना कौन कर्मचारी सरकार और जनप्रतिनिधियों पर इस तरह दांत दिखाने की हिम्मत करता!
"जो कर्मचारी जनता के टैक्स से वेतन पाते हैं, वही कर्मचारी सत्ता को चुनौती देने लगें, तो जनता का भरोसा किस पर टिके?"
रांकई वही जगह है जहाँ—एक बीएलओ प्रलोभन देता है, दूसरा अभद्रता करता है, और अब सचिव सरकारी संस्था की गरिमा पर ही प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। और यह सब पंचायत मंत्री के जिले में हो रहा है—एक विडंबना जो कई सवाल खड़े करती है।
मीडिया द्वारा जो वीडियो सामने लाए गए, उनका जवाब देने की जगह कुछ कर्मचारियों ने जनप्रतिनिधियों पर अपशब्दों का इस्तेमाल कर जवाबदेही से पलायन कर लिया। यह नहीं माना जा सकता कि यह केवल व्यक्तिगत चूक है—यह सिस्टम के ढीले तंत्र और निगरानी की विफलता का प्रतिबिंब है।
जनहित में अब सवाल उठता है—क्या प्रशासन तत्काल और सख्त कदम उठाएगा? क्या उन कर्मचारियों के खिलाफ निवारक और अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी जिनकी हरकतों ने सरकार और पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई?
"रांकई में SIR फॉर्म घोटाले की हर नई परत यह साबित कर रही है कि, यहां सिर्फ फॉर्म नहीं भरे गए,बल्कि जिम्मेदारियों के ताबूत में कीलें ठोकी गई हैं।
अगर ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई,तो यह मामला सिर्फ रांकई तक सीमित नहीं रहेगा —यह मिसाल बनेगा कि सरकारी कुर्सी का दुरुपयोग कैसे किया जाता है।और व्यवस्था की धज्जियां कैसे उड़ाई जाती हैं!
अगर आप इस मामले में जानकारी या कोई वीडियो/दस्तावेज भेजना चाहते हैं, तो नीचे दिए व्हाट्सएप नंबर पर भेजें। आपकी सामग्री जांच के बाद रिपोर्टिंग में शामिल की जाएगी।
