https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi_nXYDircpji_NBp4Y2oyo8rhVeU-DuXusJaP3AW8


 


 


 


📰 STRINGER24 NEWS

दो क्षेत्रों में रिपोर्टिंग का व्यक्तिगत अनुभव: स्वतंत्रता और संवेदनशीलता

हाल ही में मुझे दो अलग-अलग इलाकों में रिपोर्टिंग करने का मौका मिला — मोहपानी और रांकई। दोनों ही जगहें खबरों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन कवरेज के दौरान जो अनुभव मुझे हुआ, वह बिल्कुल अलग और व्यक्तिगत था।

मोहपानी में अनुभव

मोहपानी में मैं तीन जेसीबी तालाबों के निर्माण में चार लाख रुपए की कथित हेरफेर की जांच कर रहा था। यह इलाका गाडरवारा क्षेत्र का बहुसंख्यक समुदाय वाला रिहायशी क्षेत्र है। यहां रिपोर्टिंग करते समय मुझे मीडिया का सम्मान देखने को मिला। लोग स्वतंत्र रूप से बात कर रहे थे, खुलकर सवाल पूछ रहे थे, और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर चर्चा करने में कोई रोक-टोक नहीं थी। पत्रकारिता की यह स्वतंत्रता और लोकतंत्र की खुली हवा महसूस करना मेरे लिए बेहद ताजगी देने वाला अनुभव था।

रांकई में अनुभव

रांकई में (SIR स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) मामले की कवरेज करते समय मैंने अप्रत्यक्ष रूप से दबाव और असहजपन महसूस किया। यह इलाका करेली क्षेत्र का अल्पसंख्यक बाहुल्य है। इस दौरान हमने देखा कि मीडिया के साथ कभी-कभी अभद्रता, गैरजिम्मेदाराना बातों का प्रयोग और प्रलोभन के माध्यम से दबाव बनाने की कोशिशें की जाती हैं। यह सीधे रोक-टोक नहीं थी, लेकिन पत्रकारिता करते समय सतर्क और संवेदनशील रहना आवश्यक था। हर सवाल और हर संवाद में सावधानी बरतनी पड़ती थी, ताकि रिपोर्टिंग निष्पक्ष और सत्य पर आधारित बनी रहे।

यह अनुभव मुझे याद दिलाता है कि पत्रकारिता केवल तथ्यों को सामने लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक संदर्भ और परिस्थितियों की समझ भी जरूरी है।

सारांश

संक्षेप में, दोनों जगहों पर रिपोर्टिंग का अनुभव अलग था — मोहपानी में खुलापन और विश्वास, रांकई में सतर्कता और असहजपन। यह व्यक्तिगत अनुभव पत्रकारिता की चुनौतियों और जिम्मेदारी को स्पष्ट करता है।

अगले अंक में आप पढ़ेंगे कि,आखिर क्यों रांकाई में खबरों पर दबाव महसूस होता है.....?
© STRINGER24 NEWS | सत्य और समाज के बीच की कड़ी.
Previous Post Next Post

📻 पॉडकास्ट सुनने के लिए यहां क्लिक करें।

🎙️ Stringer24News Podcast

🔴 देखिए आज का ताज़ा पॉडकास्ट सीधे Stringer24News पर