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अपात्रों पर कृपा बरसा रही ग्राम पंचायत करपगांव?
जनपद चिचली में भाड़ा देकर भाड़ में जा रहा विकास!
ग्राम पंचायत करपगांव में विकास के नाम पर जो खेल चल रहा है, वह अब ‘भ्रष्टाचार का उत्सव’ बन चुका है! जिन लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए, वे अब भी दर-दर भटक रहे हैं — जबकि ‘अपात्रों’ पर कृपा की ऐसी वर्षा हो रही है मानो जनपद के अधिकारी आंखों पर पट्टी बांधे बैठे हों।
आखिर कौन हैं वो लोग, जिन्हें गरीबों की योजनाओं का ठेका मिल गया है?
क्या जनपद चिचली में अब पात्रता की परिभाषा रिश्वत से तय होती है?
और सबसे बड़ा सवाल — क्या ग्राम पंचायत करपगांव में अधिकारी खुद मिलीभगत का हिस्सा बन चुके हैं?
सूत्र बताते हैं कि पंचायत में हाल ही में किए गए कई भुगतान “भाड़ा”, “मजदूरी”, और “सामग्री आपूर्ति” के नाम पर किए गए, लेकिन हकीकत में इनमें से कई काम कागज़ों तक ही सीमित हैं। गांव में न तो उतनी मिट्टी डली, न मजदूरों को पूरा भुगतान मिला — मगर खातों में रकम का खेल चल गया!
💸 आर्थिक अनियमितताओं से लूट तक का सफर!
एक ओर ग्रामीण सड़कें और नालियां गुणवत्ताहीन/अपूर्ण हैं, तो दूसरी ओर पंचायत के रिकॉर्ड में ‘पूर्ण’ दिखा दी गईं। सवाल यह है कि जब गांव में काम अधूरा है, तो भुगतान पूरा कैसे हो गया? क्या ये सब जनपद स्तर की मिलीभगत का नतीजा नहीं?
क्या ग्राम पंचायत करपगांव में मनरेगा मजदूर सिर्फ कागज़ पर ही काम करते हैं?
क्या सचिव-सहायक और सरपंच के बीच ‘कमीशन फिक्सिंग’ ही असली विकास योजना है?
आखिर किसके इशारे पर जनपद चिचली चुप्पी साधे बैठा है?
अब समय आ गया है कि जिला प्रशासन करपगांव पंचायत के भुगतानों और योजनाओं की स्वतंत्र जांच करवाए। क्योंकि ग्रामीण अब सवाल पूछ रहे हैं — “भाड़ा लेकर भाड़ में जा रहा विकास” आखिर कब तक यूं ही चलता रहेगा?
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