नरसिंहपुर। ग्राम पंचायत मोहपानी में मनरेगा मजदूरी योजना का खुलेआम मज़ाक उड़ाया जा रहा है। सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरों की मेहनत दर्ज है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि तीन तालाबों का निर्माण पूरी तरह जेसीबी मशीनों से कराया गया। मजदूरों के नाम पर फर्जी भुगतान किए गए और योजना को लूट का ज़रिया बना दिया गया।
ग्रामीणों ने इस घोटाले की शिकायत जिला पंचायत से लेकर जिला कलेक्टर तक की — लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक सन्नाटा है।
शिकायतों के बावजूद जनपद चिचली सीईओ ने पंचायत सचिव सत्यनारायण पर न तो जांच बैठाई, न ही कोई ठोस कदम उठाया। सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसे गंभीर मामले में सीईओ चुप क्यों हैं?
ग्रामीणों में यह चर्चा जोरों पर है कि मामले को दबाने के एवज में मोटी रिश्वत का खेल खेला गया है। क्या वाकई जनपद चिचली के सीईओ ने अपने जमीर को बेच दिया? क्या कुर्सी की सुरक्षा के बदले भ्रष्टाचार की ढाल ओढ़ ली?
अगर जिला प्रशासन अब भी मौन रहा, तो यह केवल एक पंचायत का मामला नहीं रहेगा — यह पूरे जनपद में जवाबदेही के तंत्र पर सवाल खड़ा करेगा।
जनता अब पूछ रही है — क्या चिचली जनपद को ऐसे अफसरों के हवाले छोड़ दिया गया है जो न तो योजनाओं की निगरानी करते हैं, न ही शिकायतों पर कार्रवाई?
आखिर जनपद चिचली में जनता को अधिकारी चाहिए... या दलाल?
रिपोर्ट: STRINGER24 NEWS संवाददाता
© STRINGER24 NEWS | सत्य और समाज के बीच की कड़ी.
