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रेलवे स्टेशन के पास कुचबंदिया बस्ती: अवैध शराब, जुआ और उत्पात — पुलिस की नज़दीकी पर सवाल

नरसिंहपुर/गाडरवारा रूट — रिपोर्टर: विक्रम सिंह राजपूत | शुक्रवारिय विशेषांक

विशेष रिपोर्ट : रेलवे स्टेशन के ठीक पास स्थित कुचबंदिया झोपड़पट्टी में महिलाएं और पुरुष खुलेआम न केवल अवैध कच्ची शराब बेचते और पीते देखे जाते हैं, बल्कि कई बार स्टेशन प्लेटफार्म पर शराब के नशे में उत्पात बरपाने की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह धंधा बरसों से चल रहा है और रेलवे पुलिस की मिलीभगत के आरोपों से इनकार करना मुश्किल है — क्योंकि स्टेशन थाने से मात्र कुछ कदमों की दूरी पर ही यह सारा खेल चलता है।

स्थानिक स्थिति — मामला कहां और कैसे

कुचबंदिया बस्ती रेलवे स्टेशन के उत्तरी गेट के पास बसी है। यहाँ बनी झोपड़पट्टियों के सामने प्लेटफॉर्म की ओर छोटी-छोटी दूकानें और हट बने हुए हैं, जहाँ कच्ची शराब (महुआ/देशी) खुलेआम बेची जाती है और कई बार महिलाएं भी बिक्री व सेवन दोनों में सक्रिय दिखाई देती हैं।

शाम होते ही प्लेटफार्म पर लोगों का जमावड़ा होता है और शराब के नशे में कई बार उत्पात की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं — दूसरों से बहस, बाधा, और कभी-कभी छोटी-मोटी मारपीट तक।

"स्टेशन से बस आधे मिनट चलो तो वही सब नज़र आ जाता है — शराब की कतारें, जुआ और रोज़मर्रा का उत्पात। थाने से दूरी इतनी कम है कि हमें समझ ही नहीं आता कि कैसे यह सब चलता है।" — एक स्थानीय निवासी।

अलाभकारी मिलीभगत के आरोप

स्थानीय लोगों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह अवैध कारोबार सिर्फ बदमाशों का व्यक्तिगत धंधा नहीं रहा — इसमें स्थानीय रेलवे पुलिस और कुछ प्रभावशाली दावेदारों की मिलीभगत की बात भी बार-बार सामने आती रही है। उनसे पूछताछ करने पर कई बार शिकायतें दर्ज न होने की बात कही गई या फिर मामूली जुर्माना भरकर मामलों को टाला जाना बताया गया।

न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रमुख प्रश्न:

  • क्या रेलवे पुलिस की निगरानी व रवैया पर्याप्त है?
  • क्यों यह संदिग्ध गतिविधियां स्टेशन-थाने की सीधी नज़दीकी के बावजूद बरकरार हैं?
  • कहाँ जा रही है यह अवैध अगली कड़ी — बिक्री से होने वाला पैसा किसके हाथ में जा रहा है?

खुलेआम जुआ और पारिवारिक टूटन

कुचबंदिया झोपड़पट्टी में नशा के साथ-साथ जुआ भी आम दृश्य है। कई घरों में पुरुष व महिलाएं शाम-शाम को जुए में हिस्सा लेते दिखते हैं — इससे घरेलू आर्थिक स्थिति और बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। शिक्षा छूटी दिखाई देती है और कई परिवारों में कर्ज व धीमी आर्थिक गिरावट की शिकायतें आम हैं।

अधिकारियों से मांग

स्थानीय समाजसेवकों और कुछ जागरूक नागरिकों ने कहा है कि आवश्यक है —

  1. रेलवे पुलिस तथा स्थानीय थाना के बीच समन्वय बढ़ाया जाए और नियमित छापे डाले जाएँ।
  2. स्थायी नशामुक्ति तथा पुनर्वास योजना की शुरुआत किये जाने की आवश्यकता है — विशेषकर महिलाओं के लिए।
  3. स्थानीय व धनविहीन परिवारों के लिए आर्थिक तथा रोजगार परक कार्यक्रम लागू किए जाएँ ताकि लोग अवैध धंधों से दूर रहें।

निष्कर्ष — यह केवल बस्ती की समस्या नहीं

रेलवे स्टेशन के पास चल रहा यह अवैध कारोबार सिर्फ कुचबंदिया बस्ती की समस्या नहीं रह गया — यह सार्वजनिक सुरक्षा, कानून व्यवस्था और मानवाधिकार का मुद्दा बन चुका है। प्रशासनिक कार्रवाई, सामुदायिक जागरूकता और ठोस पुनर्वास नीतियाँ लागू किये बिना यह समस्या और गहरी होती जाएगी।

हमारी अपील: वरिष्ठ प्रशासन, रेलवे सुरक्षा बल और समाज सेवा संस्थान मिलकर प्राथमिक कदम उठाएँ — जांच कराएं, नशामुक्ति शिविर लगवाएं और प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक रोज़गार उपलब्ध कराएँ।

© STRINGER24NEWS | सत्य और समाज के बीच की कड़ी.
रिपोर्टर: विक्रम सिंह राजपूत ·stringer24News/पंचायत रेडियो विशेषांक · नरसिंहपुर/गाडरवारा
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