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सत्य और समाज के बीच की कड़ी

🔥 सचिव बना लुटेरा? मोहपानी में मची हाहाकार!

चार लाख का मशीनी तालाब, मजदूरों की फर्जी हाजिरी, और गांववालों का उबलता गुस्सा!

रिपोर्ट — Stringer24 News | मोहपानी विशेष रिपोर्ट

“गरीबों के खून-पसीने से बना था मनरेगा, लेकिन यहाँ पसीना सूख गया और पैसा सचिव की जेब में बह गया!”
— एक बुज़ुर्ग ग्रामीण की आवाज़ जो आज पूरे मोहपानी की चीख बन चुकी है।

🩸 मोहपानी की मिट्टी से उठ रही है करप्शन की बदबू

ग्राम पंचायत मोहपानी में सचिव सत्यनारायण पर आरोप है कि उसने मशीन से तालाब खुदवाकर फर्जी मजदूरों के नाम पर ₹4 लाख से ज़्यादा की रकम डकार ली। गाँव की गलियों में अब ये चर्चा आम है — “तालाब खुदा मशीन से, लेकिन भुगतान हुआ इंसानों के नाम पर!”

“हमने तो जेसीबी चलते देखी थी, मजदूरों को नहीं। लेकिन भुगतान हमारे नाम पर निकल गया। अब पूछो तो सचिव हँस देता है!”

💰 तिजोरी का मुंह खुला, गरीबों की झोली खाली

जहाँ मनरेगा का पैसा मजदूरों के हाथों में जाना चाहिए था, वहां सचिव की तिजोरी मोटी होती गई। गाँव के कई परिवार महीनों से बिना मजदूरी के हैं, बच्चों के स्कूल बंद, घरों में रोटी की कमी — और दूसरी तरफ आरोप ये कि सचिव ने “अपने हिस्से की मलाई पहले ही निकाल ली।”

“सत्यनारायण ने गरीबों के हिस्से के अधिकार तक बेच दिया है। अब तो हमें शर्म आती है इस सिस्टम पर।” — एक आक्रोशित महिला ग्रामीण

⚙️ मशीन चली, कागज़ी मजदूर दौड़े!

सूत्रों के अनुसार तालाब खुदाई में सिर्फ जेसीबी चली, लेकिन रिकॉर्ड में सैकड़ों मजदूरों की हाजिरी भरी गई। कई नाम तो ऐसे हैं जिन्हें खुद नहीं पता कि वे “सरकारी मजदूर” बन चुके हैं!

ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में तारीख, हाजिरी और भुगतान का पूरा खेल साफ दिखता है — पर प्रशासन चुप है। जनपद चिचली के अधिकारियों से कई बार शिकायत होने के बावजूद अब तक जांच का एक कागज़ भी नहीं हिला।

⚠️ गांव में फैला खौफ और गुस्सा

गांव के लोग कहते हैं, “अगर आवाज़ उठाओ तो सचिव के करीबी धमकाने आते हैं।” कई ग्रामीण डर के साये में हैं, लेकिन अब यह मामला ‘सिस्टम बनाम जनता’ में बदल चुका है। लोग खुलेआम सवाल पूछ रहे हैं —

“क्या अब सचिव चांदी के टुकड़ों की लालच में गांववालों के जिस्म से लहू की आखिरी बूंद भी निचोड़ लेगा?”

🧾 प्रशासन की चुप्पी और जनता का सवाल

कलेक्टर और सीईओ तक शिकायतें पहुंच चुकी हैं। लेकिन चुप्पी ऐसी कि मानो सब कुछ ठीक हो! क्या ये चुप्पी सिर्फ अफसरशाही की लापरवाही है या किसी बड़ी सांठगांठ की आहट?

“अगर गरीबों की मजदूरी पर डाका डालने वाला सुरक्षित है, तो न्याय नाम की चीज़ मर चुकी है।” — मोहपानी के ग्रामीण

🚨 अब माँग सिर्फ एक — गिरफ्तारी और जांच!

मोहपानी के मजदूरों ने मांग की है कि सत्यनारायण को तत्काल निलंबित कर निष्पक्ष जांच की जाए। वे कहते हैं, अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो वे जन आंदोलन शुरू करेंगे।

🩸 Stringer24 संपादकीय चेतावनी

अगर ये आरोप सच साबित होते हैं, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं — पूरा सिस्टम की सड़ांध का खुलासा होगा। मनरेगा जैसी गरीब-उन्मुख योजना को निजी तिजोरी में बदल देना राष्ट्र के खिलाफ अपराध है। अब सवाल प्रशासन से — क्या आप कार्रवाई करेंगे या अगले गांव की मिट्टी भी इसी तरह लाल होगी?

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