रांकई की ख़ामोशी मत खरीदो
लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को जंजीरों में जकड़ने की कोशिशें शर्मनाक
रांकई में खबर रोकने का दबाव बनाना, पत्रकारों पर मानसिक बोझ डालना और मीडिया की स्वतंत्र रिपोर्टिंग में दखल देना न सिर्फ़ लोकतांत्रिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है, बल्कि जनता के जानने के अधिकार पर सीधा हमला है। यह मुहिम इसी प्रयास के खिलाफ रांकई की जनता, पत्रकारों और जागरूक नागरिकों की संयुक्त आवाज़ है।
मुख्य संदेश:
"सच पर ताला नहीं लगेगा — रांकई बोलेगा"
"सच पर ताला नहीं लगेगा — रांकई बोलेगा"
मुहिम का उद्देश्य
- खबर दबाने की कोशिशों का सार्वजनिक विरोध
- पत्रकारों के अधिकार और सुरक्षा पर जागरूकता
- रांकई की जनता को अपनी आवाज़ दर्ज कराने का मंच
- #रांकई_बोलेगा और #खबर_दबेगी_नहीं सोशल मीडिया कैंपेन
हमारी अपील
"जो लोग सच को दबाने की कोशिश करते हैं—वो सच से सबसे ज़्यादा डरते हैं। रांकई बोलेगा, और ज़ोर से बोलेगा।"
अपनी आवाज़ जोड़ें
यदि आपके पास रांकई की किसी घटना, दबाव या शिकायत की जानकारी है, तो उसे साझा करें। आपका नाम पूर्णतः गोपनीय रखा जाएगा।
#रांकई_बोलेगा
#खबर_दबेगी_नहीं
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