ग्राम पंचायत तेंदूखेड़ा में रेत खनन और पंचायत गबन — दोनों साथ-साथ?
तेंदूखेड़ा क्षेत्र से इस समय दो बड़े सवाल उभरकर सामने आ रहे हैं—पहला, अवैध रेत खनन का बढ़ता दबदबा; दूसरा, ग्राम पंचायत के बिलों में भारी अनियमितताएँ। ग्रामीणों के आरोप और दस्तावेज़ दोनों ही इस ओर इशारा करते हैं कि पंचायत के भीतर कुछ गड़बड़ जरूर चल रही है।
मनमाने बिल, मनचाही रकम — किसको दी जा रही कृपा?
जिस तरह मनमाने तरीके से बिल लगाए गए, उसे देखकर ग्रामीणों में यह चर्चा ज़ोरों पर है कि सरपंच पति द्वारा अपने 'कृपा पात्रों' को लाभ पहुँचाने के लिए नियम-कायदों को बुरी तरह पीछे छोड़ दिया गया है!
पंचायत फंड का उपयोग किस आधार पर और किन व्यक्तियों के लिए किया गया—इसका कोई स्पष्ट जवाब फिलहाल नहीं मिल रहा।
अवैध रेत खनन ने पकड़ी रफ़्तार
तेंदूखेड़ा के आसपास के क्षेत्र में अवैध रेत खनन की गति लगातार बढ़ रही है। सूत्रों की मानें तो रात के अंधेरे में ट्रैक्टर और डंपर निकलना आम बात बन चुका है, जबकि स्थानीय प्रशासन की निगरानी पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा होने लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि खनन और पंचायत अनियमितताओं में ‘कुछ लोगों’ की साझेदारी से इन दोनों मामलों को बढ़ावा मिल रहा है।
पंचायत के बिलों में अनियमितता और खनन में तेजी—दोनों मिलकर तेंदूखेड़ा में शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। ग्रामीण अब खुलकर जांच की मांग कर रहे हैं।
