चांवरपाठा जनपद बना गबन का गढ़?
ग्राम पंचायत भूमियाढाना से उठी गबन की गंध — सरपंच, सचिव और जीआरएस पर गंभीर आरोप
सरपंच ममता यादव, पंचायत सचिव और जीआरएस पर आर्थिक अनियमितताओं, कमीशनखोरी और दस्तावेज़ों में हेरफेर के आरोप — क्या भूमियाढाना बन गया है गबन का नया गढ़?
ग्राम पंचायत भूमियाढाना में विकास कार्यों के नाम पर भारी अनियमितताओं की चर्चा पूरे चांवरपाठा जनपद में फैल चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कमीशन का खेल इतना गहरा है कि हर योजना, हर भुगतान और हर दस्तावेज़ पहले कमीशन से तय होता है, विकास बाद में।
- दस्तावेज़ों में हेरफेर और फर्जी हस्ताक्षर
- कमीशन के लिए बिल–वाउचर में बदलाव
- बिना कार्य के भुगतान
- मनरेगा श्रमिकों के नाम पर फर्जी प्रविष्टियाँ
- एमबी (माप पुस्तिका) में मनमाने संशोधन
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों की फाइलों में सुधार होते रहते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ दिखाई नहीं देता। कई बार भुगतान ऐसे लोगों के नाम पर किया गया जिनके बारे में पूछने पर पता चलता है कि वे काम पर आए ही नहीं थे।
"कागजों में सड़क बन जाती है, सफाई हो जाती है, स्कूल मरम्मत हो जाता है… पर जमीन पर कुछ नहीं! सब कागजों का खेल और कमीशन की परतें हैं।"
सरपंच सचिव की मिलीभगत
सरपंच ममता यादव,सचिव और जीआरएस पर मिलीभगत के द्वारा पंचायत में आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं!ग्रामीणों का कहना है कि,अधिकारी क्या बिल क्रॉस चेक करने के जहमत नहीं उठाते हैं?
क्या करेगा प्रशासन?
जनपद और जिला स्तर पर अब इस मामले में जांच की मांग उठ रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि भुगतान, एमबी और वाउचर की पूरी ऑडिट की जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।
