नरसिंहपुर / चिचली। जनपद चिचली अंतर्गत ग्राम पंचायत मोहपानी में सचिव का रवैया सरपंच और पंचों के लिए परेशानी बन गया है। पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों का मानदेय रोक दिया गया और उनके कामकाज में लगातार बाधा डाली जा रही है।
ग्रामीणों,सरपंच और पंचायत प्रतिनिधि का आरोप है कि सचिव अपने मनमाने आदेशों से पंचायत के कामकाज को प्रभावित कर रहा है!और सरपंच तथा पंचों को अपमानित कर रहा है? सवाल उठता है कि जब चुने हुए जनप्रतिनिधि ही प्रताड़ित हों, तो जनता के हित और पंचायत के कामकाज की सुरक्षा कैसे होगी?
मोहपानी से मुख्य सवाल
- सरपंच और पंचों का मानदेय रोकना सचिव का अधिकार था या मनमानी?
- क्या जिला कलेक्टर को यह जानकारी है कि पंचायत प्रतिनिधि प्रताड़ित हो रहे हैं?
- क्या जेसीबी तालाब मामले में पंचायत के बिल और खर्चों की स्वतंत्र जांच करवाई गई है?
- क्या सचिव पर पहले भी शिकायतें हुई हैं और उनका निस्तारण हुआ या संरक्षण मिला?
- क्या जिला प्रशासन लोकतंत्र की इस गिरावट पर नजर रख रहा है या मौन साधे है?
- आख़िरकार, जिला कलेक्टर का संदेश क्या है: लोकतंत्र की रक्षा या जवाबदेही की अनदेखी?
मोहपानी के सरपंच और पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप और सचिव के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। उनका कहना है कि जब तक ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, पंचायत में लोकतंत्र और जनहित दोनों खतरे में हैं।
गाँव की असली आवाज़, जमीन से रिपोर्टिंग
