⚠️ महत्वपूर्ण सूचना
“हर महीने कुछ दिन ऐसे होते हैं, जब शरीर काम से ज़्यादा आराम माँगता है। लेकिन सवाल ये है — क्या हमारे काम की दुनिया उस दर्द और थकान को समझती है? निजी सेक्टर की महिलाएँ, चाहे वे दफ़्तरों में हों या दुकानों पर — मासिक धर्म के दिनों में भी काम से छुट्टी नहीं ले पातीं। शरीर दर्द से झुका होता है, पर चेहरे पर मुस्कान ज़रूरी मानी जाती है। “दर्द को ‘कमज़ोरी’ कहने वाली सोच ही असली बीमारी है।” हाल ही में कर्नाटक सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब राज्य में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को हर महीने एक दिन का भुगतानित मासिक धर्म अवकाश मिलेगा। यानी साल में 12 दिन की मेंस्ट्रुअल लीव, बिना वेतन कटे। यह नीति “Menstrual Leave Policy, 2025” के तहत लागू की गई है — जो भारत में इस रूप में पहली बार हो रहा है। “कर्नाटक ने वो कर दिखाया, जिसकी बातें अब तक सिर्फ मंचों और अभियानों में होती थीं।” अब समय है कि अन्य राज्य और निजी कंपनियाँ भी इस नीति से प्रेरणा लें। कार्यस्थल पर समानता और सहानुभूति के साथ पॉलिसी बदलाव लाना ही असली प्रगति है।यह फोरम और इसका कंटेंट विशेष रूप से महिलाओं के लिए तैयार किया गया है। कृपया ध्यान दें कि यहाँ साझा की गई जानकारी, चर्चा और सलाह महिलाओं के हित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।
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