*गांव की गलियों से ज्यादा गंदी निकली सरपंच सचिव की नियत? : ग्राम पंचायत झिरिया माता:जनपद साईखेड़ा:नरसिंहपुर*
साफ-सफाई के नाम पर गांव को चमकाने का वादा करने वाले ही निकले सबसे बड़े गंदे खिलाड़ी। सरकारी खजाने से निकली सफाई की रकम गटर में नहीं, बल्कि इनकी जेबों में बह गई। लेकिन आखिर क्यों करते रहे सरपंच और सचिव ये काली करतूत? किसके इशारे पर चला ये पूरा खेल, और कौन-कौन था इसमें शामिल?
अब खुलने वाला है घोटाले का वो पिटारा, जिसमें दबे हैं कई चेहरे और कई राज। हर नाम आएगा सामने, हर चाल बेनकाब होगी। तैयार रहिए — क्योंकि हम करेंगे पूरा खुलासा, और बताएंगे कि गांव की सफाई की रकम कैसे बनी कुछ लोगों की कमाई का ज़रिया!
गांव की गलियों में जितनी धूल नहीं उड़ती, उससे ज़्यादा परतें अब रहस्य की उठ रही हैं। सरकारी फाइलों में सब कुछ “सही” दिखाया गया, लेकिन हकीकत में कुछ तो ऐसा हुआ है जो दस्तावेज़ों में कहीं दर्ज नहीं।
रकम आई… लेकिन पहुंची कहां, ये किसी को ठीक-ठीक नहीं मालूम। कागज़ों में काम पूरा दिखा, मगर गांव की आंखों ने कभी वो काम होते देखा नहीं। अब सवाल ये है — आख़िर कौन चला रहा था ये परदे के पीछे का खेल, और किसकी जेबें भारी हो रही थीं “सेवा” के नाम पर?
गांव को लूटने वाले इन लुटेरों का दिल तक नहीं पसीजा!
ग्रामीणों के विकास की आशा को भ्रष्टाचार के इन दरिंदों ने बेरहमी से रौंद दिया।
लालच के अंधे इन हैवानों ने सरकारी राशि को उड़ाने में ज़रा भी हिचक नहीं दिखाई।
अब सवाल ये है — कौन हैं वो चेहरे जो मासूम गांव की उम्मीदों पर डाका डालकर आज भी मुस्कुरा रहे हैं?
