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STRINGER24NEWS
सत्य और समाज के बीच की कड़ी
अलविदा कहने से पहले यह दर्द पढ़ना जरूरी है!
(हमेशा के लिए लिखना बंद करने का वक्त आ गया...मेरी आवाज के उतार-चढ़ाव से वाकिफ हैं—लेकिन..)

आप में से बहुत से लोग मुझे जानते हैं, मेरी आवाज के उतार-चढ़ाव से वाकिफ हैं—लेकिन सच बताऊँ तो पिछले कुछ महीनों से मेरा शरीर अब मेरा साथ नहीं दे रहा है। फील्ड पर उतरना, माइक थामकर सवालों के जवाब माँगना अब मेरे बस में नहीं रहा।

वर्ष 2016 से 2019 तक newslive88 वेबसाइट एवं यूट्यूब चैनल का संचालन किया गया। कोरोना काल के बाद वर्ष 2020-21 में कंपनी की सेवाएं स्थगित करनी पड़ीं, किंतु कोरोना के बाद भी कंपनी का दोबारा संचालन संभव नहीं हो सका और तब वर्ष 2021 में Stringer24News की स्थापना की गई।

हमारे पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे, जेब में बड़े विज्ञापनदाताओं के चेक नहीं थे, लेकिन एक जिद थी, सच लिखने की, खबर दिखाने की।

वर्ष 2021 से अब तक का यह सफर किसी लंबी दास्तां से कम नहीं रहा। सीमित संसाधनों के बावजूद, आप सबका प्यार और भरोसा ही था जो Stringer24News को लगातार, बिना रुके और निष्पक्षता के साथ आप तक खबरें पहुंचाने की ताकत देता रहा।

सच यह है कि जिंदगी हर मोर्चे पर एक जैसी नहीं रहती। हमने हर संभव कोशिश की कि खबरों की आंच धीमी न पड़े।

अस्पताल के काउंटर पर खड़े होकर जब डॉक्टर ने महीनों के इलाज और महंगी दवाओं का लंबा-चौड़ा पर्चा थमाया, तो समझ आ गया कि जज्बे से पेट भले भर जाए, लेकिन अस्पताल का बिल नहीं भरता। कारवां चलाने के लिए जो धन चाहिए, वह अब पूरी तरह चुक चुका है।

इस निष्पक्षता और निरंतरता की एक बहुत बड़ी व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ी है। लगातार महंगे इलाज और दवाओं के आर्थिक बोझ ने अब कमर तोड़ दी है।

पहले लिवर का गंभीर उपचार फिर एक भयानक कार दुर्घटना, जिसमें मेरी पसलियों में सूजन और फ्रैक्चर हुआ और इन सबके बीच, मेरी जीवनसंगिनी की रीढ़ और कंधे की हड्डी में फ्रैक्चर, इन सब मेडिकल आपदाओं ने हमारे जीवन की सारी जमा-पूंजी और हौसले को झकझोर कर रख दिया।

माना कि पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, एक 'सेवा' है। लेकिन एक स्वतंत्र समाचार सेवा को जिंदा रखने, उसके तकनीकी खर्चों और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी धन और संसाधनों की आवश्यकता होती है, जो अब पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं।

आर्थिक सहयोग की गुहार लगाना मेरा जमीर गंवारा नहीं करता। बस, दिल में एक टीस है कि जिस निष्पक्षता के साथ हमने आपकी आवाज बनने की कोशिश की, उसे अब यूं बीच सफर में रोकना पड़ रहा है।

इन विषम और अत्यंत पीड़ादायक परिस्थितियों में, आप सबसे विदा लेने का यह निर्णय लेना मेरे लिए पहाड़ जैसा कठिन था। ऐसा कोई विकल्प बचा ही नहीं था, जिसके सहारे इस कारवां को और आगे बढ़ाया जा सके।

अपना ख्याल रखिएगा। शायद अब इस परदे पर कभी कोई खबर न आए क्योंकि खबर लिखने वाले की अपनी ही जिंदगी एक लाइलाज खबर बनकर रह गई है।

इन बीते वर्षों में आपने जो अपनापन, स्नेह और मान-सम्मान दिया है, उसके लिए मेरा सिर आपके आगे नतमस्तक है। अलविदा, और क्षमा कीजिएगा!

आपका अपना,
संचालक, Stringer24News
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