https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi_nXYDircpji_NBp4Y2oyo8rhVeU-DuXusJaP3AW8


 


 


 

*गणेश विसर्जन के दौरान एनजीटी नियमों का हुआ उल्लंघन?: नरसिंहपुर*

विगत कुछ वर्षों से एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार नदी के पास विसर्जन तट पर कुंड बनाकर प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जा रहा था!

प्रशासन द्वारा विभिन्न चिन्हित स्थानों पर तालाब को प्रतिमा विसर्जन करने चिन्हांकित किया गया और वहां कुंड की व्यवस्था की गई, इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग प्रतिमाएं शेड नदी में विसर्जित कर रहे थे।

जिस तरह से शेड,नर्मदा नदियों में प्रतिमाओं का विसर्जन कराया गया, उससे प्रतिमा का केमिकल नदी में जाना तय है! प्रतिमाओं का अवशेष हटाने के बाद भी केमिकल को नदियों में मिलने से नहीं रोका जा सकेगा!इससे जहां जलीय जीव-जंतु पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा!

एनजीटी  के निर्देशों के तहत नदियों में प्रतिमा विसर्जन प्रतिबंधित है।इसको लेकर प्रशासन की ओर से शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में नदी किनारे चिन्हित स्थलों पर कृत्रिम तालाब बनाये गये, इस कृत्रिम तालाब में प्रतिमाओं का विसर्जन कराने में स्थानीय प्रशासन नाकाम साबित हुआ!

नियमों का उल्लंघन करने वालों और नदी को प्रदूषित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए तथा उन पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए।

जानकारों के मुताबिक विसर्जन के इन दिनों के दौरान जो लोग नदी में स्नान करते हैं उनके लिए नदी में मौजूद भारी धातु की घातकता मस्तिष्क, फेफड़ों, गुर्दे, लिवर और अन्य महत्वपूर्ण अंगों की कार्यप्रणाली को नुकसान पहुंचा सकती है। इस तरह के धातु सांद्रण के संपर्क में लंबे समय तक रहने से पार्किंसन, अल्जाइमर और मांसंपेशियों के क्षय जैसी कई बीमारियां भी हो सकती हैं!

Previous Post Next Post

📻 पॉडकास्ट सुनने के लिए यहां क्लिक करें।

🎙️ Stringer24News Podcast

🔴 देखिए आज का ताज़ा पॉडकास्ट सीधे Stringer24News पर