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*नाग पंचमी चौरसिया दिवस के रूप में रूप में मनाई जाती*

*29 जुलाई को आयोजन*

*सभी चौरसिया बंधुओ से बेहतर जयंती मनाने का किया गया निवेदन*

*राष्ट्रीय एवं प्रदेश अध्यक्ष ने किया आग्रह सामाजिक बंधुओ से*

सालीचौका नरसिंहपुर

मां नर्मदा अंचल जिला के साथ ही पूरे मध्य प्रदेश में 29 जुलाई मंगलवार को नाग पंचमी चौरसिया दिवस के रूप में मनाई जा रही है पूरे मध्य प्रदेश में चौरसिया समाज के भले ही एक घर की समाज हो या अनगिनत चौरसिया समाज वाला बहल क्षेत्र सभी जगह चौरसिया बंधु बड़े ही हर्षोल्लास के साथ बरसों से इस त्यौहार की परंपरा को बेहतर स्वरूप में मनाए हुए हैं

*आदि पूर्वज कुलगुरु चोऋषि महाराज की होती पूजन*

 सभी जानते हैं कि चौरसिया समाज के आदि पूर्वक कुलगुरु चौऋषि महाराज हैं कोई भी कार्य करने के पहले इनकी पूजन कर कार्यक्रम प्रारंभ किया जाता है . समाज धीरे-धीरे यह बात भूलता गया बीते वर्षों में कोरोना के बाद चौरसिया समाज के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष समाज के जननायक गौरव चौरसिया विक्की भैया द्वारा पूर्व प्रदेश में जनचेतना यात्रा निकालकर चौरसिया समाज के आदि पूर्वक कुलगुरु चौमहाराज जी की फोटो मूर्ति घर दुकान प्रतिष्ठान कार्यालय में स्थापित कराई और अब सभी चौरसिया समाज की बंदू प्रतिदिन इनको पूछने लगे हैं और कार्यक्रम प्रारंभ करने के पहले पूजा करते हैं

*नाग पंचमी के अवसर पर नाग देवता बरेजो में नगबैल की होती पूजा*

वर्षों से आ रही परंपरा को आगे बढ़ते हुए भगवान नागदेव जी की पूजा अर्चना भक्ति भाव से करते हैं सभी पान बरेजा में चौरसिया बंधु श्रद्धा भाव से नाग बैल महाराज की पूजा करते हैं अब यह उत्साह काफी तेजी के साथ होने लगा है सभी स्थानों के चौरसिया परिवार के प्रतिष्ठान स्थल बंद रहते हैं लगभग सभी जगह सामूहिक कार्यक्रम किसी निर्धारित स्थल पर किया जाता है और वहां भगवान भोलेनाथ जी कै परिवार सहित और नागदेव भगवान की विशेष पूजा अर्चना महाआरती विधि विधान से होकर प्रसाद वितरण का कार्यक्रम होता है और विशाल स्तर पर जुलूस निकालने की परंपरा भी अब काफी विशाल रूप में होने लगी है कई स्थानों पर विशाल भंडारा एवं भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतिभाशाली छात्र एवं छात्राओं बुजुर्गों समाजसेवियों का भी सम्मान किया जाता है चौरसिया समाज अब नाग पंचमी के त्यौहार को बेहतर बना रहा है

*समाज की लंबित मांगों को शासन तक ज्ञापन पत्र के माध्यम से सामाजिक बंधु भेजें*

  वर्तमान में लंबे समय से जो सरकार बन रही है उसमें मैं चौरसिया समाज का महत्वपूर्ण योगदान है कटु सत्य है और इसमें चौरसिया समाज का 90% मत संबंधित पार्टी को जाता है और अन्य पिछड़ा वर्ग की जो पांच प्रमुख जातियां हैं उसमें चौरसिया समाज बहुलता से है वह कई क्षेत्र और विधानसभा तो चौरसिया बाहुल्य जो की राजनीति और रणनीति का निर्धारण करते हैं किंतु उन सबके बावजूद चौरसिया समाज को लंबे समय से सत्ता और संगठन से दूर रखा गया है अब समय आ गया है कि नाग पंचमी के अवसर पर अपने-अपने आसपास के माननीय जन प्रतिनिधियों को कार्यक्रम में आमंत्रित करें और उनको चौरसिया समाज की ओर से दिए जाने वाला मांग पत्र मध्य प्रदेश शासन के मुख्यमंत्री महोदय तक जरूर पहुंचाएं जिसमें चौरसिया समाज की लंबे समय से मध्य प्रदेश की वर्तमान सरकार द्वारा घोषित महापंचायत शीघ्र की जाए लगभग 7 वर्ष पहले घोषित लगभग स्वीकृत पान विकास निगम का शुरू शीघ्र प्रारंभ करते हुए अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री उपाध्यक्ष को राज मंत्री और 11 सदस्य समिति बनाई जाए मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की मुख्य संगठन में और अन्य पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ में चौरसिया समाज को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाए इसके साथ ही स्थानीय मतदान केंद्र वार्ड से लेकर प्रदेश तक चौरसिया समाज की प्रतिबद्धता और समर्पित भाव के बावजूद भी सत्ता और संगठन में क्यों चौरसिया समाज स्थान से वंचित है उसको भी जगह-जगह स्थापित किए जाएं कुछ समय बाद मध्य प्रदेश सरकार द्वारा होने वाले एल्डरमैन की नियुक्ति हो रही है उसमें भी प्रत्येक नगरी क्षेत्र से चौरसिया समाज को प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए चौरसिया समाज के व्यक्तियों को जगह भूखंड उपलब्ध कराया जाए ताकि माननीय जन प्रतिनिधियों के सहयोग से चौरसिया भवन का निर्माण हो सके और साप्ताहिक एवं मुख्य बाजार में पान व्यवसाईयों के लिए छोटा-छोटा पान दरीबा के रूप में स्थापित किया जाए माननीय जनप्रतिनिधियों विधायक लोकसभा सांसद राज्यसभा सांसद जी के प्रत्येक विधानसभा एवं नगरी क्षेत्र में प्रतिनिधि के रूप में अनिवार्य रूप से प्राथमिकता के आधार पर नियुक्त किए जाएं अब समय आ गया है चौरसिया जयंती नाग पंचमी के अवसर पर चौरसिया समाज अपने अधिकारों और कर्तव्य के लिए शासन प्रशासन तक यह बात पहुंचना है और जिम्मेदारी के साथ जिस तरह मतदान देकर सरकार बनाने में योगदान किया जाता है अपना अधिकार भी प्राप्त करें और समाज को मजबूत बनाने में सभी का अपने-अपने स्थान पर योगदान जरूरी है 

*चौरसिया समाज के राष्ट्रीय प्रदेश अध्यक्ष ने किया सभी से बेहतर पर्व को मनाने का आग्रह*

अखिल भारतीय आदर्श चौरसिया महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जन चेतना यात्रा के माध्यम से चौरसिया समाज को गांव गांव तक पहचान दिलाने वाले राजधानी भोपाल में तात्कालिक मेघालय के राज्यपाल बाबू गंगा प्रसाद प्रसाद चौरसिया जी के द्वारा पूरे प्रदेश के लगभग 214 समाज के स्थानीय निकाय के जन प्रतिनिधियों का सम्मान करने वाले समाज के संघर्ष नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव चौरसिया विक्की भैया एवं अखिल भारतीय आदर्श चौरसिया महासभा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष 9 वर्षों से प्रतिदिन माननीय मुख्यमंत्री जी को मां नर्मदा अंचल के साथ चौरसिया समाज की मांगों को पत्र लिखने वाले मां नर्मदा अंचल क्षेत्र के अधिमान पत्रकार जीवेश चौरसिया ने मध्य प्रदेश में निवास करने वाले सभी चौरसिया बंधुओ से विनम्र निवेदन किया है कि चौरसिया दिवस नाग पंचमी के इस बेहतर पर्व को बेहतर से बेहतर बनाने में अपना सहयोग कर समाज को नई ऊर्जा और नई दिशा देने में अपनी-अपने भूमिका का निर्माण करें और समाज को मजबूत दिशा में ले जाने में सहयोग करें

*चौरसिया समाज का उपजातियां के नाम से जाना जाता है*

चौरसिया जाति के इतिहास को जितना ही अधिक गहराइयों से खोजते हैं तो अलग-अलग उतना ही अधिक विचित्रताओं एवं की क्दंतियों से से भरा हुआ है क्योंकि देश के विभिन्न विभिन्न क्षेत्रीय प्रदेशों में यह जाति विभिन्न नाम से प्रचलित है जैसे चौ ऋषि. बरई .तंबोली .मोदी मंडल .शर्मा .नागवंशी. रावत .मंडल भगत .महोबिया. पंसारी. ब्रह्ऋषि. कुमरावत आदि जाति से जानी जाती है इसलिए इनकी उत्पत्ति का इतिहास मूल रूप से एक होने के बाद भी उपजाति चौरसिया ही है इस जाति को सरकारी मान्यता में पिछड़ा वर्ग से आती है

*पानका उपयोग सभी धार्मिक कार्यों के साथ औषधि में भी प्रमुख माना जाता*

चौरसिया जाति का प्रमुख धंधा पान की खेती करना पान बेचना हुआ करता था अर्थात पृथ्वी पर पान का आना ही चौरसिया जाति की उत्पत्ति को दर्शित करता है अपने धार्मिक ग्रंथो में जहां-जहां अभी तांबूल शब्द का उल्लेख हुआ है पान शब्द का ही उल्लेख हुआ इसलिए चौरसिया जाति की उत्पत्ति का इतिहास नाग वेली तांबूल लता पान की उत्पत्ति के साथ जुड़ा हुआ है यह नाग वेली रहस्यमई पीयूष लता है जो औषधि गुण से भरपूर है मुख शुद्धि खाने योग्य इसमें न फल है ना फूल है न बी ज ना ही साधारण कृषि के अनुकूल है इसकी खेती अधिक धूप छांव से बचाकर सावधानी से पूर्व की जाती है

*पाताल लोक से पृथ्वी लोक पर लाया गया नाग बेल को*

इस पान के आगमन वर्धन तथा उपयोग का इतिहास भगवान शिव पार्वती ब्रह्मा जी के पुत्र ब्रह्म ऋषि मुनियों के चिंतन मनन नाग लीला एवं पौराणिक गाथाओं से आधारित है पान कालांतर में पहले पृथ्वी पर था ही नहीं इसे पाताल लोक में नाग राजा के पास से लाया गया है इसे लाने की जरूरत एक महान यज्ञ सृष्टि कल्याण हेतु देवताओं द्वारा यज्ञ आयोजित करना था परंतु बिना पान के यज्ञ पूर्ण सफल होना संभव नहीं था तपस्वी मुनि महर्षि चौ ऋषि महाराज जी के सहयोग से पाताल में नागलोक के राजा बासुकीसे मांग कर पृथ्वी पर लेकर आए जो की नागकन्या नाग बेली के रूप में तांबूल लता जो कि हम आप पान पत्र रूप में जानते हैं इसलिए पान पूजन की विशेष सामग्री मानी जाती है पान के बिना यज्ञ पूजन पूर्ण नहीं माना माना जाता है

अर्थात पृथ्वी पर पान पत्र का आना ही चौरसिया जाति की उत्पत्ति से जुड़ा हुआ है

*84 ब्रह्मपुत्र की संतान 84 गोत्र चौरसिया समाज के*

चौरसिया का शुद्ध शब्द चौ ऋषि है 84 ब्रह्ऋषि पुत्रों की संतान से 84 गोत्र विभाजित हुए इन्हीं ऋषियों की वंशावली के प्रमाण के कारण भी चौरसिया बोलने लगे. चौरसिया समाज पिछड़ा वर्ग का महत्वपूर्ण सबसे उच्च पांच बहुल जातियों में माना जाता है और उसके कई उपनाम से माना जाता है

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