*सरपंच पति का पुतला दहन:सरपंच पति प्रथा के विरोध में लामबंद हुए ग्रामीण?: ग्राम पंचायत मोहपानी: जनपद चिचली:नरसिंहपुर*
विगत दिवस ग्राम पंचायत मोहपानी की यात्रा के दौरान एक मजेदार वाकया सामने आया।जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं की, फिलहाल इस समय मोहपानी पंचायत जितेंद्र,सरपंच पति और ग्रामीणों के बीच चल रही उठा पटक का मैदान बनी हुई है।जहां एक तरफ जितेंद्र को कमीशन का अहंकार और सरपंच पति प्रथा का सहारा है वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों को संविधान और न्याय प्रणाली पर विश्वास है?ऐसे में यह देखना रोचक होगा कि, जीत किसके हिस्से में आती है? क्या जितेंद्र करप्ट सिस्टम के बलबूते पर जीत जायेगा या फिर ग्रामीणों के अधिकार की जीत होगी?
इसी उठा पटक के बीच ग्रामीणों ने एक बैठक के दौरान सरपंच पति के पुतला दहन का निर्णय लिया और शाम को पुतला दहन किया जाना तय किया गया।शाम को जब चौपाल पर कुछ लोग इकट्ठे हुए तब उनसे पुतला दहन के बारे में पूछा। तब एक आदिवासी युवक जो की उस समय चौपाल पर ही मोजुद था,ठहाके लगाकर हसने लगा।जब उसके इस तरह अचानक हसने की वजह पूछी , तो कहने लगा कि,सर सुबह तो हम लोगों ने सरपंच पति के पुतला दहन का निर्णय लिया लेकिन जब दोपहर को कुछ लोगों ने अपना मत रखा की,सरपंच पति का पुतला दहन करने में हमें शर्म आ रही है, एक तो वह हमारी ही समाज का है,उसका पुतला रावण की तरह जलाना पड़ेगा यह सोचकर ही शर्म आती है।
हालाकी वहीं एक अन्य स्थानीय ग्रामीण ने उस युवक की बात काटते हुए कहा कि,भले ही वह हमारी समाज का है,लेकिन जित्तू के कहने पर सरपंच के फर्जी हस्ताक्षर कर के सरपंच पद की मर्यादा को भंग कर रहा है, यह खुले तौर पर सविधान और लोकतंत्र का अपमान है।अपनी बात आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण ने कहा कि,जब झुनिया बाई के पति को अपने समाज की चिंता नही और जितेंद्र के हाथ में पंचायत की कमान दे रखी है,तब ऐसे सिस्टम का विरोध करने के लिए सरपंच पति का पुतला दहन करना ही होगा।
एक अन्य व्यक्ति ने भी हां में हां मिलाते हुए कहा कि,सरपंच पति को शर्म लगना चाहिए जो अपने ही गांव वालों के हिस्से के विकास को पलीता लगा रहा है।सरपंच पति को सरपंच के हस्ताक्षर करने का अधिकार किसने दिया? जितेंद् के इशारों पर कठपुतली की तरह चलने वाले सरपंच पति का पुतला दहन करके यह गांव आस पास मोजूद अन्य ग्राम पंचायतों के लिए एक मिसाल कायम करने जा रहा है।
तब ऐसे में तय किया गया की, पहले स्थानीय प्रशासन को लिखित शिकायती आवेदन देकर सूचना दी जाए और उसके बाद कार्यवाही ना होने की स्थिति में सरपंच पति का पुतला दहन कर धरना प्रदर्शन का आरंभ किया जाएगा। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन को सूचना प्रेषित कर दी है,और 30 तारीख का इंतजार कर रहे हैं।
जारी :
जानिए क्या कहना है जितेंद्र कौरव का , , आखिर क्या है उनका रुख और रवैया, , ?
