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Stringer24 News
सत्य और समाज के बीच की कड़ी
मोदी सरकार का गन्ना एफआरपी फैसला किसानों के साथ “क्रूर मजाक”
प्रति क्विंटल 10 रुपये की मामूली बढ़ोतरी पर देशभर के किसानों में गहरा आक्रोश

अखिल भारतीय गन्ना किसान महासंघ (AISFF) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य जगदीश पटेल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष डी. रवींद्रन और महासचिव पुष्पेंद्र त्यागी द्वारा जारी विज्ञप्ति में केंद्र सरकार के 2026-27 सीजन के लिए घोषित गन्ना एफआरपी वृद्धि को अत्यंत अपर्याप्त, असंवेदनशील और किसानों के साथ क्रूर मजाक बताया है।

सरकार द्वारा घोषित मात्र 10 रुपये प्रति क्विंटल (यानी 10 पैसे प्रति किलो) की वृद्धि को किसान संगठनों ने पूरी तरह निरर्थक और अपमानजनक करार दिया है।

संगठन का कहना है कि जब डीजल, उर्वरक, सिंचाई, कटाई और परिवहन जैसी सभी लागतें लगातार बढ़ रही हैं, तब इतनी मामूली वृद्धि किसानों के दर्द का मजाक उड़ाने जैसी है।

किसानों की स्पष्ट मांग है कि स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के आधार पर गन्ने का एफआरपी कम से कम 550 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए।

किसान संगठनों ने CACP द्वारा अपनाए गए A2+FL फॉर्मूले को भी पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि यह वास्तविक उत्पादन लागत को दर्शाता ही नहीं है, खासकर गन्ने जैसी मेहनत और लागत-प्रधान फसल के लिए।

AISFF ने देशभर के गन्ना किसानों से आह्वान किया है कि वे इस नीति-विरोधी और किसान-विरोधी फैसले का एकजुट होकर विरोध करें और 550 रुपये प्रति क्विंटल एफआरपी की मांग को मजबूती से उठाएं।

“यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है”

जगदीश पटेल
अखिल भारतीय गन्ना किसान महासंघ (AISFF)
📞 9827986787

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