*नर्सों को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का सामना?*
स्थानीय निजी चिकित्सालय में काम करने वाली नर्स राधिका (परिवर्तित नाम) ने कहा कि काम पर उत्पीड़न एक ऐसी चीज है जिसे उन्होंने स्वीकार करना सीख लिया है। मुझे ऐसा लगता है कि यह इतना सामान्य है कि मैं भूल गई कि यह यौन उत्पीड़न भी है।
दरअसल हमें अब काम करते करते यह सब सहने की आदत हो गई है। नाईट शिफ्ट के दौरान हम जो सहती हैं,उसे किसी से बता भी नही सकते।घरवालों से तो बिल्कुल भी नहीं।यौन उत्पीड़न और लैंगिक भेदभाव सभी व्यवसायों में आम बात हो गई है, और स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता कोई अपवाद नहीं हैं।
नर्सों ने वार्ता के दौरान नाम और पहचान जाहिर ना किए जाने की शर्त पर बताया कि काम के दौरान किसी ना किसी बहाने ने उनके सीने पर हाथ फेरने की कोशिश की जाती थी,कभी सूनापन देखकर हाथ पकड़ लिए जाते थे, जांघ पर हाथ से सहलाने की कोशिश की जाती थी।प्रबंधन और सहकर्मियों का रवैया बिलकुल भी ठीक नही था लेकिन विरोध करने का मतलब नौकरी से हाथ धोना था, चुपचाप सहने के सिवाय कोई और रास्ता नही था।
यौन उत्पीड़न नर्सों की व्यापक देखभाल प्रदान करने की क्षमता को ख़राब कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप मनोवैज्ञानिक परेशानी, काम की प्रतिबद्धता में कमी, अनुपस्थिति और नौकरी से बर्खास्तगी हो जाती है।अधिकांश नर्सों को कार्यस्थल पर विभिन्न रूपों में यौन उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है।
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की कई घटनाएं कई कारणों से दर्ज नहीं की जाती हैं, जिनमें सांस्कृतिक कारक, नकारात्मक परिणाम, सहकर्मी दबाव और पीड़ित की अनिच्छा शामिल हैं। कार्यस्थल में यौन उत्पीड़न एक ऐसा विषय है जिसे सामाजिक कलंक के कारण अक्सर टाला जाता है।
।। विवेचना।।
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