*नगर पालिका की कामचोरी?:नरसिंहपुर।*
अपने ही मुंह मियां मिट्ठू बनने वाले नगर पालिका प्रशासन के दावों की पोल उस समय खुल जाती है,जब आप शहर के मुख्य मार्गों और चौराहों के इतर शहर की गलियों में झांकते हैं!भले ही स्थानीय प्रशासन सोशल मीडिया पर साफ सफाई की फोटो अपलोड कर अपने ही हाथों पानी पीठ थपथपा रहा हो!इससे अधिक ढिठाई और क्या होगी? यह निर्लज्जता का चरम है? धरातलीय स्तर पर हालात चीख चीख कर सच्चाई बयां कर रहे हैं लेकिन बेशर्मी का आलम है की,जिम्मेदारों के कानो पर जूं तक नहीं रेंग रही है?
वहीं सड़क पर आवारा मवेशियों के उत्पात मचाने पर भी नगर पालिका अंकुश नहीं लगा सकी है,जबकि अभी कुछ समय पूर्व ही सड़क पर आवारा कुत्ते के हमले से घायल एक बच्चे ने दम तोड दिया था! एसी रूम में बैठकर कुर्सी पर पैर हिलाते हुए काम करने वालों को शहर के आम नागरिक के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं है? हैरानी की बात है की, जिला कलेक्टर शीतला पटले को शहर भ्रमण के दौरान कोई खामियां दिखती ही नही हैं!
शहर में फुटपाथ पर अतिक्रमण पर पैदल चलने वालों से उनका अधिकार छीना जा रहा है और फुटपाथ पर दुकानदारों का कब्जा है,लेकिन स्थानीय प्रशासन पैदल चलने वालों की सुध नहीं ले रहा है!
शहर के आंतरिक इलाकों में साफ सफाई को लेकर हालात बेहद खराब हैं।महीनो से नालियों की साफ सफाई नही की जा रही है,जिसकी वजह से गर्मी में मच्छरो का प्रकोप बढ़ गया है।गलियों के नुक्कड़ों पर कूड़े का ढेर लगा हुआ है,जहां आवारा गौ वंश का जमावड़ा लगा रहता है,ये आवारा मवेशी कूड़े में भोजन की तलाश के लिए पहुंचते हैं और कूड़े को सड़क तक फैला देते हैं।
अब तक सांड,गाय और आवारा श्वानो के हमले में कितने ही नागरिक जख्मी हो गए हैं,कुछ तो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है,जबकि हमले की अनगिनत छिटपुट घटनाएं दर्ज ही नही की जाती है!
जिले में संचालित गौ शालाओं में आवारा तू वंश को क्यों नही विस्थापित किया जा रहा है?क्या गौ शालाओं में भूसा नहीं है या फिर गौ शालाओं में व्यवस्था ही नही है?शहर की सड़कों और गलियों को आवारा गौ वंश और श्वानो से मुक्त करने के लिए कदम कब उठाए जाएंगे? जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा तब!