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सांकेतिक चित्र।

*बिजली और पानी को तरस रहे आदिवासी?: ये विकास खोखला है?: ग्राम पंचायत भिलमाढाना: चिचली:नरसिंहपुर।*

ग्रामीण अंचलों में विकास की जो तस्वीर दिखाई दे रही है,वह खुद ही विकास की सच्चाई बयां कर रही है। सच्चाई यही है कि,आदिवासियों को सरकारी योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं, ये गांव विकास से कोसों दूर है।

बिजली न होने के कारण उन लोगों को ऐसे बहुत से समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिसका अनुभव आप और हम नहीं कर सकते है। आदिवासी आज भी अंधेरा दूर करने के लिए चिमनी, टॉर्च को जलाकर अपनी समस्या का समाधान करने में लगे रहते हैं।उन घरों में रहने वाले लोगो के लिए अंधेरे में रहना कितना कठिन है, यह सिर्फ वही लोगों महसूस कर सकते हैं। कई सालों से ये लोग इसी तरह से बिजली की समस्या से जूझ रहे हैं।

आदिवासियों के लिए शासन द्वारा न जाने कितनी योजनाएं बनाई गई। लेकिन मैदानी स्तर पर यह सार्थक होती दिखाई नहीं देती। नतीजा आज भी जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र में निवास करने वाले लोग मूलभूत सुविधाओं तक के लिए तरस रहे हैं।

सरकार सैकड़ों वादे करती है, बीते सालों में देश में बहुत कुछ बदला, लेकिन इन बदलाव के बाद आज भी गरीबों के लिए शुद्ध पानी,बिजली और आने जाने के लिए सड़क मुहैया नहीं हो सका।

आदिवासी समुदाय के लोग, मूलभूत सुविधाओं दिए जाने वाले आश्वासन पर अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं।अधिकारी भी परेशानियों का हवाला देकर सिर्फ आश्वासन देते हैं। मगर गांव के आदिवासियों की जिंदगी बद से बदतर होते जा रही है।

लोग विकास की राह देख रहे हैं, लेकिन विकास के इंतजार में बैठे लोगों पर और विकास से कोसों दूर इस गांव पर अधिकारियों की नजर अब तक नहीं पड़ी है।

यहां हम सिर्फ एक ही गांव कोटरी , मोहपानी, भिलमाढाना के बारे में बात नहीं कर रहे हैं बल्कि ऐसे बहुत से गांव हैं जहां आज भी बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

ग्रामीण कहते हैं, कि आगामी 26/ 9/ 2023 को गाडरवारा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत भीलमाढाना आदिवासी क्षेत्र में प्रचार रथ पहुंचेगा।लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि पिछले 4 साल से ग्राम कोठरी में बिजली नहीं है,, 18 साल से मध्य प्रदेश में मामा जी की सरकार होने के बाद भी कुआं का गंदा पानी पीने के लिए मजबूर है आदिवासी।

क्या सिर्फ प्रचार रथ पहुंचा देने से अधिकारियों नेताओं का कर्तव्य पूरा हो जाएगा? या फिर आदिवासी भाई अभी भी इसी तरह अपना जीवन इसी तरह जीने के लिए मजबूर रहेंगे? बीते 18 साल से पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई,4 साल से लाइट बंद है!

चुनाव के दौरान कुर्सी पर काबीज होने के लिए हर राजनीतिक पार्टियां गांव के विकास की लाखों दावे करती हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही राजनेता अपने वादे भुल जाते हैं, कुर्सी पर विराजमान होते ही कई नेताओं की तकदीर और तस्वीर जरूर बदली है, लेकिन गरीब की जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आता है।






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