*क्या ग्राम पंचायत बेदू में विकास हुआ है?*
।। विवेचना ।।
रंग रोगन और कुछ निर्माण कार्यों के जरिए विकास की बदली हुई तस्वीर दिखाने की कोशिश तो की गई है लेकिन क्या यह आंकड़ों की तस्वीर धरातलीय सच्चाई से मेल खाती भी है या नहीं।
हमारी यह विवेचना कुछ बड़ी हो सकती है लेकिन इसके संक्षेप में आम जनता तक पहुंचाने का मतलब होता की आम जनता के साथ इंसाफ नहीं किया गया,जबकि यह लोगों को जानने का हक है,कि आज नरसिंहपुर जिले के विकास पथ पर बेदू कहां है?
विगत वर्ष 2021 एवम 2022 में पंचायत की कार्यशैली लगातार विवादों में घिरी रही।यदि गांव के वर्ष 2021 एवम 2022 के कार्यकाल की बात करें तो,यह असंतोष जनक ही कहा जाएगा।
विगत दो वर्षों में गांव में कोई खास बदलाव नहीं दिखाई दिया,बल्की इसके विपरित तब ग्राम पंचायत से भ्रष्टाचार की खबरें लगातार मिल रही थी।
*वैसे तो गबन ,घोटाले और हेर फेर में ग्राम पंचायत बेदू का नाम पहली बार खबर में नही आ रहा है।इसके पूर्व भी वर्ष 2021 में जिला कलेक्टर रोहित सिंह के कार्यकाल में बेदू ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना में जमकर भ्रष्टाचार किया गया था तब तत्कालीन कलेक्टर द्वारा जांच के आदेश भी जारी किए गए थे,और विभागीय अमले द्वारा जांच की खानापूर्ति भी की गई और मामले की सच्चाई को फाइलों में दफन कर दिया गया था।*
*दरअसल जब कोरोना काल में इंसानियत एक मुश्किल दौर में गुजर रही थी तब सचिव और गांव का दबंग स्वर्ण परिवार भ्रष्टाचार के धन से अपनी झोली भर रहा था।सरकारी योजनाओं को कैसे पलीता लगाया जा सकता है?ग्राम बेदू इसका जीता जागता उदाहरण है।*
*जब गांव के लोग भूख और आर्थिक संकट से जूझ रहे थे,गरीब तबका दाने दाने के लिए परेशान हो रहा था,लोग परेशान थे तब मनरेगा मजदूरी में छेड़छाड़ कर अपनी तिजोरियों को भर रहे थे। जहां एक तबका मुसीबतें झेल रहा था वहीं भ्रष्ट सरकारी राशि को हड़प रहे थे। समाचार सेवा प्रदाता कंपनी stringer24news के पास तमाम साक्ष्य सुरक्षित रूप से मोजूद है। मामले से जुड़ी तमाम फोटो,वीडियो देखने के लिए आप हमारी वेबसाइट पर जा सकते है।*
आज विकास को आप महज सरकारी बिल्डिंगो की चमक से नही आंक सकते हैं।इस चमक के पीछे झुग्गियों में आज कितना अंधेरा छाया हुआ है?
जहां तक अगर सबसे पहले बात कोरोना काल में हुए भ्रष्टाचार की बात करें तो संभव है की यह नरसिंहपुर जिले के इतिहास की सबसे बुरी घटना के तौर पर देखा जायेगा।क्यों की तब सिर्फ सरकारी राशि को पलीता नही लगाया जा रहा था बल्कि इंसानियत को भी तार तार किया जा रहा था।जरूरत मंद ग्रामीण सरकारी मदद की राह देख रहे थे लेकीन जिम्मेदार जेबें गर्म करने में मशगूल थे।यह मानवता के नाम पर कलंक नही है तो और फिर इसे क्या कहा जाए?जब इंसानियत दम तोड रही हो और जिम्मेदार अपनी तिजोरियों को भर रहे थे,क्या इससे शर्मनाक भी कुछ हो सकता था।
अब यदि हम 2023 के वर्तमान कार्यकाल की बात करें तो, , ,
*जारी :*
हाल ही में जो मामला सामने आया है,, , ,,
