सांकेतिक चित्र।
(कहते हैं, जब रोम जल रहा था,तब नीरो बंसी बजा रहा था।)
Date:: 21/12/2023 time 6:47 pm
सट्टा के अवैध कारोबार ने कई घरों को तबाह कर दिया है। सब कुछ जानते हुए भी पुलिस जिस प्रकार आंख बंद किए बैठी है उससे पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे है।
यह किसी एक शहर गांव और कस्बे की कहानी नहीं है अमूमन ऐसे हालात अनेकों शहर कस्बे और गांव में देखने को मिल ही जाते हैं!क्या आपका शहर और क्या मेरा!
ऐसे में सवाल उठता है कि क्षेत्र में चल रहे अवैध कारोबार से प्रशासन नजर चुरा रहा है और वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह कर रहा है?
क्षेत्र में इस खेल के बढ़ते कारोबार का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि महिलाएं एवं बच्चे भी दिन-रात अंकों के जाल में उलझे रहते हैं। प्रमुख खाईवाल के एजेंट जो पट्टी काटते हैं प्राय: हर गली-मोहल्ले में आसानी से पट्टïी काटते नजर आते हैं।
कथित तौर पर यह भी सामने आया है कि खाईवाल के गुर्गे खुद ही चौक-चौराहों पर यह बोलते नजर आते हैं कि आज ले गये थे, अब एक सप्ताह, महीने भर कोई दिक्कत नहीं है।
क्षेत्र में कानून व्यवस्था इस तरह बिगड़ी है कि आपराधिक गतिविधियों में लिप्त लोगों को पुलिस का जरा भी भय नहीं है?
नाम न जाहिर करने की शर्त पर कुछ
इलाकाई लोगो को कहना है कि नगर में धड़ल्ले से चल रहे इस कारोबार को इलाके के चंद सफेदपोश नेताओं, तथाकथित कानून के रखवालो का संरक्षण प्राप्त है।
सूत्र बताते है की ये रकम लाखो में है तभी लगता है की पुलिस खुद इन सटोरियों पर कार्यवाही करने से घबराती है?
सूत्रों के मुताबिक लोग फोन पर अपना नंबर बताते लिखवाते हैं और नंबर आने पर इन्हीं सट्टा खाईवाल एजेंटों के माध्यम से पैसे का लेन-देन किया जाता है।
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि पुलिस सट्टे, जुआ के इस अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लगा सकती। कुछ पुलिस अधिकारी ऐसे भी आए जिन्होंने सट्टे और जुए के कारोबार को पूरी तरह बंद करा दिया था। अब कुछ पुलिस अधिकारियों की शह और चंद नेताओं की सहमति से नगर में यह कारोबार फिर से फलने फूलने लगा है!
बढ़ते सट्टे व जुए के कारोबार के चलते लोग काफी परेशान हैं। उनका आरोप है कि अगर इन लोगों के खिलाफ कुछ कहा जाता है तो वो जान से मारने की धमकी देते हैं।
सूत्रों के मुताबिक कई सटोरियों तो खुलेआम यह कहकर लोगों को विश्वास दिलाते हैं कि उनकी सेटिंग पुलिस से हो गई हैI अब कोई कुछ नहीं कर सकता, कारोबारियों के उक्त दावों मैं सच्चाई भी दिखती है?
अब सवाल यह उठता है कि पुलिस प्रशासन जिसका काम कानून न्याय व्यवस्था संभालना है जब वही इन सटोरियों जुआरियों को संरक्षण प्रदान करने लगेगा तो आखिर आमजन का पुलिस प्रशासन पर कैसे भरोषा कायम हो पायेगा?
जारी :
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