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एक पत्रकार के काम में सिर्फ खबर को निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ दिखाना मात्र शामिल नहीं है बल्कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर प्रकाश डालना और सवाल पूछना भी एक पत्रकार का कर्तव्य है।

कई बार अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए जान का जोखिम उठाकर किसी घटनाक्रम,गबन,भ्रष्टाचार अथवा स्टोरी पर काम करना पड़ता है।

पहली नजर में तो यह काफी रोमांचकारी लगता है।लेकिन इसके दूसरे पहलू पर गौर करना भी उतना ही जरूरी है।

एक पत्रकार रोजाना किस तरह का जोखिम उठाता है,इस बात को समझे बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्द बाजी होगी। 

दिन खबरों,मुद्दों और फोन कॉल्स में कब गुजर जाता है इसका पता ही नही चलता।

क्या आपने कभी सोचा है की, एक पत्रकार जब किसी सड़क हादसे, फांसी कांड,अग्नि कांड इत्यादि में हताहत लोगों को कवर कर रहा होता है,तब उसकी मानसिक स्थिति क्या होती है?जब कभी वह इंसानियत को मरते हुए देखता है तब वह क्या सोचता है? प्रशानिक तंत्र की शैली से टकराते सवाल करते जब वह जूझता है तब आखिर वह किस दौर से गुजर रहा होता है?जब कभी अवैध नशे के कारोबार,अतिक्रमण भू माफिया के बारे में जब खबर बनती और धमकियों और मानसिक दबाव से गुजरना पड़ता है तब एक पत्रकार की सुरक्षा के बारे में कौन सोचता है? कितने दुश्मन और कितनी रंजिशें इस बीच एक पत्रकार को झेलना पड़ती है इसका अंदाजा सहजता से नही लगाया जा सकता है।

अगर मैं अपने बारे में बात करूं तो जब कभी मेरा सामना ऐसे हादसों से होता है तब उस दिन मुझे भूख नहीं लगती है,तरह तरह से सवाल और चिताएं मन में उठती हैं।बड़ी बेचैनी महसूस करता हूं।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को जंजीरों से जकड़े जाने की कोशिशें आज भी जारी हैं। कभी ये जंजीरें प्रलोभन और आश्वासन की सुनहरी जंजीरें है!तो कभी डर और दबाव की अंधेरी काली जंजीरें हैं!

हर दिन एक ऐसा युद्ध जहां आप चक्रव्यूह में हैं!उस पर भी सच न लिखने का दबाव?लोकतंत्र जब पहरे में हो,प्रशासन कठपुतली और शासन तानाशाह हो जाता है तब एक पत्रकार का दायित्व और उसकी जान का जोखिम दोनो ही बड़ जाता है।

हालातों से समझौता और मुद्दों से सौदा न करने वाले पत्रकारों के परिवारों के बारे में कभी सोचा नहीं जाता। एक पत्रकार से उम्मीद तो ढेरों लगाई जाती है लेकिन उसकी सामाजिक ,शारीरिक और आर्थिक सुरक्षा के बारे में सवाल नही उठाए जाते।

 लेकीन बावजूद इसके पत्रकार अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। माना की पत्रकारों का एक बड़ा वर्ग आज संदेह के दायरे में हैं लेकिन सभी को एक जमात में खड़ा करना भी उचित नही है।

जहां तक हम हमारी टीम stringer24news के डेली रूटीन के बारे में बात करें तो आपको बता दें कि, हम स्थानीय सभी ख़बरों पर रिपोर्टिंग करते हैं। दरअसल हमारे पास दूसरे पत्रकारों की तरह काम के चुनाव का विकल्प नहीं है जो किसी खास बीट पर रिपोर्टिंग करते हैं।हमारी टीम को जैसे ही किसी घटना की सुचना मिलती है,तब जितनी जल्दी हो सके हमारी टीम घटना-स्थल पर पहुँचने की कोशिश करती हैं और हम घटना को कवर करते हैं।जब भी हम किसी गांव अथवा नए क्षेत्र के दौरे पर जाते हैं ,तब वहाँ के स्थानीय लोगों से बातचीत कर उन्हें अपना कॉन्टेक्ट नंबर अवशय देते हैं जिससे कि जरूरत पड़ने पर या इलाके में कुछ ऐसा घटने पर टीम से संपर्क कर सके।इस दौरान आंतरिक ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में कई बार तो दोपहर चाय और बिस्किट के साथ गुजर जाती हैं।

सच कहूं तो आज भी ग्रामीण अंचलों में वास्तविक हालात यह है कि लोग पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं जैसी मौलिक सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यहाँ न तो अच्छे चिकित्सालय है न ही बेहतर शिक्षा संस्थान। यह ऐसी व्यवथाएं है जिन पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।

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