ग्राम पंचायत।
नरसिंहपुर जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में भाई भतीजावाद की तर्ज पर अपनो को उपकृत करने का चलन आज आम हो गया है।चहेतों को रेवडियां बांटी जा रही हैं।आंगनबाड़ी के पद पर स्थापना हो,या ग्राम पंचायत के कार्यों के लिए ठेके दिए गए हों,या फिर फर्जी बिलों के जरिए कूट रचित दस्तावेजों के माध्यम से अपने कृपा पात्रों को अवैध तरीके से लाभ पहुंचाया गया हो इन सब बातों में एक समानता है और वह यह है की जिन्हे भी लाभ पहुंचाया गया वे कहीं न कहीं ग्राम प्रधान के करीबी थे।कुछ रिश्तेदार और कुछ खास दोस्तों को नजराने के तौर पर शासन की राशी को पलीता लगाकर सुअवसर उपलब्ध कराए गए।
हैरानी की बात है की कोई महिला सिर्फ ३५ किलोग्राम राशन के लिए सिसक सिसक कर रोती है और उसे नियमों का हवाला दिया जाता है किंतु वहीं दूसरी ओर अपनो को उपकृत करने की ख्वाहिश में हर नियम को ताक पर रख दिया जाता है और छककर मलाई पर हाथ साफ किया जाता है।
ग्राम प्रधान का हाथ जिसके सर पर हो भला फिर उसे और किसी बात की क्या चिंता।इसका नतीजा यह होता है कि कृपापात्र स्थानीय ग्रामीणों को ही दबंगई दिखाने से पीछे नहीं हटते।
ऐसा नहीं की इस रेवड़ी का बंटवारा सिर्फ चुनिंदा जाति भाइयों और चहेतों के बीच किया गया।बल्कि जिन कलमकारो ने इस मुद्दे पर आवाज बुलंद करने की सोची उन पर भी खूब कृपा बरसाई गई। कलमकार को महज इतना करना था की बस अपनी लेखनी खामोश रखे और लिफाफे के चाह में ऐसा ही किया भी गया। जिसका परिणाम यह निकला कि खबरों से सच्चाई का एक बड़ा हिस्सा ही गायब किया जाने लगा।
चन्द कलमकारों ने जब आम जनता के सामने सच लाने की कोशिश भी की तो उनको डराने धमकाने की कोशिश की गई।उनकी खबरों को अफवाह बताकर टालने की कोशिश की गई।और इस काम में लिफाफे पाने वाले कलमकारों का भरपूर सहयोग लिया गया।
ग्राम प्रधान की इस उदारता से अभिभूत होकर उपकृत होने वाले चहेते और विशेष कृपा पात्र सोशल मीडिया पर गांव की बदहाली को दरकिनार कर गाल बजाते हुए आसानी से मिल जायेंगे।इन्हे महज चापलूसों की श्रेणी में रखा जाना उचित नहीं है,क्यों की ये चहेते और कृपा पात्र अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने की चाहत में गांव के विकास को दीमक की तरह चाट रहे हैं।
इतना ही नहीं ग्राम प्रधान और उनके चहेतों के साथ विशेष कृपा पत्रों के इस खेल में धर्म को भी जरिया बनाया जाता है,आयोजनों और बंदरबाट के इस खेल में धार्मिक आयोजनों के नाम पर खेले जाने वाले उगाही के खेल में लाखों के वाहरे न्यारे किए जाते हैं जिसकी जानकारी भोली भाली जनता को दिया जाना उचित नही समझा जाता।
जल्द ही होगा पर्दाफाश,अनेक चेहरे होंगे बेनकाब।
आखिर कौन है वो जो दीमक बनकर गांव के विकास को चाट रहे हैं।
आगामी अपडेट
www.stringer24news.blogspot.com पर।