गोटेगांव।
मुख्य मार्ग अपनी दुर्गति की गाथा खुद ब खुद बयां कर रहा है।शहर के सुंदर बनाने के लिए डिवाईडर के बीच लगाए गए ट्री गार्ड जर्जर हो गए हैं किंतु उन पर रंग रोगन कर वातविकता पर पर्दा डाल दिया गया है। रेलवे स्टेशन रोड पर जाते समय मार्ग में पड़ने वाले शराब के ठेके के बाहर शराबियों का जमघट लगा रहता है।खुली सड़क पर बैठकर मदिरापान किया जाना ना सिर्फ सामाजिकता और नैतिकता बल्कि वैधानिक रूप से भी उचित नहीं है।किंतु महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा दर किनार कर इस और कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
वैसे तो गोटागांव में विकास के नाम पर अच्छी खासी धनराशि का खर्च किया गाय, बावजूद इसके अब भी गोटेगांव की स्थिति ठीक नहीं कही जा सकती है।अंदरूनी बस्तियों में तो हालात और भी बदतर है।
जर्जर सड़कें, अस्वछता,यातायात अराजकता जैसी तमाम परेशानियों से आम आदमी को रोज आंखें चार करनी पड़ती है।किंतु जिम्मेदार सिर्फ आंकड़े दिखाकर आम जनता को संतुष्ट करने की कोशिश करते हुए दिखाई देते हैं।