ग्राम बचई।
महाकौशल शुगर मिल से निकल रहे अपशिष्ट ने स्थानीय ग्रामीणों का जीवन दुभर कर दिया है।शाम होते ही हालात और भी बुरे हो जाते हैं।मिल प्रबंधन द्वारा स्थानीय निवासियों को देखते हुए इस विषय पर कोई ठोस कार्याही ना किया जाना दर्शाता है की इंसानी जान कितनी सस्ती है।आंखों और सांसों में शुगर मिल से निकले अपशिष्ट के उड़ते डस्ट के कण जाने से अनेक तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
वहीं दूसरी ओर अपशिष्ट को शुगर मिल के पीछे ठीक तरह से निपटान किए जाने की उचित व्यवस्था ना होने से गौ वंशीय पशुओं द्वारा अपशिष्ट खाया जाना भी चिंताजनक और घातक है।जहां एक तरफ पशु के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव तो पड़ता ही है दूध की क्षमता और गुणवत्ता पर भी गंभीर असर पड़ता है।
लेकिन आज निजी स्वार्थों पूंजीपतियों को इतनी संकीर्ण मानसिकता का बना दिया है की इनके लिए विज्ञापन बाटना आसान है ,लेकिन वही राशि जनता की सुविधाओं पर खर्च करने से गुरेज किया जाता है।