नरसिंहपुर।
नियमानुसार किराया लेने के लिए किराये पर घर देने के बाद मकान मालिक या प्रॉपर्टी मैनेजर जब मन चाहे तब किरायेदार के पास नहीं जा सकता है। किरायेदार के घर जाने से 24 घंटे पहले मकान मालिक को या तो लिखित में या मेसेज वगैरह करके इसकी सूचना किरायेदार को देनी चाहिए।किंतु पैसों के लालच का शैतान इंसानियत और नियम दोनो का खात्मा कर देता है।
आज शहर में वक़्त के साथ धीरे धीरे मध्यम वर्गीय और गरीब लोगो का रहना मुश्कील होता जा रहा है l उनके लिए समस्या और भी विकट हो गई हैजो किराये के मकानों में रहते हैं। बिजली और पानी के बिल ने तो समझो किरायदारो की खटिया खड़ी करके रख दी है
2500/- रु से लेकर 5000/- हजार रूपये किराया देने के बाद भी अगर भुगतान में विलम्ब होता है तो मकान मालिक नियम कायदों को ताक पर रखकर अभद्रता और हाथा पाई से भी गुरेज नहीं करते हैं। शासकीय कर्मियों को शासन द्वारा महगाई भत्ता प्रदान किया जाता है लेकिन वहीं दूसरी ओर निजी संस्थान या अन्य कार्य करने वालो का जीना दुश्वार हो गया है l मकान-मालिक यदि अपना मकान खाली करवाना चाहता है तो उसे पहले किरायेदार को अग्रिम नोटिस देना चाहिए अचानक न तो बह किरायेदार को घर खाली कहने को कह सकता है न ही किराया बढ़ाने को।
किरायेदार मकान-मालिक को जो किराये का भुगतान करता है तो किरायेदार को उस मकान-मालिक से उस किराये की रशीद पाने का अधिकार है किंतु अराजकता ने नियमों को दफा कर दिया है।
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