नरसिंहपुर।
वाकया हैरान कर देने वाला है,शहर के ही एक गांव से अचानक सोशल मीडिया पर एक वीडियो आता है जिसमे कथित तौर पर कुछ लोग किसी व्यक्ति से मारपीट कर रहे हैं।
तभी वीडियो पोस्ट के कमेंट बॉक्स में एक युवक पहले तो पक्षपात का आरोप जाहिर करना चाहता है,किंतु शब्दों का उचित समन्वयन ना किए जाने के कारण वह बात आई गई हो जाती है,तभी आवेश में युवक अभद्रता कर बैठता है और कुछ ऐसा लिखता है जिसके लिए वह सभी को दोषी समझ कर एक वर्ग पर ही गंभीर आरोप लगा देता है।वार्ता आगे चलती है और तमाम आरोप प्रत्यारोप किए जाते हैं।कुछ कमेंट यह बताते हैं की गांव के कुछ प्रतिष्ठित वर्ग के लोग अप्रत्यक्ष तौर पर अभद्र भाषा का उपयोग करने वाले मारपीट में शामिल युवक का पक्ष लेते नजर आए।
कमेंट बॉक्स में यहां तक सब कुछ सामान्य नजर आता है।किंतु आगे जाकर कमेंट बॉक्स एक ऐसी कचहरी बन गया जहां सारी बातें एक गंभीर रुख अख्तियार कर लेती हैं।हालाकी युवक जिस अंदाज में अपनी बात कमेंट बॉक्स में रख रहा है उसे देखकर एक पल के लिए ऐसा लगता है की युवक के भीतर बहुत आक्रोश है एवम युवक को अपनी बातों पर पूर्ण विश्वास है।हालाकी तथ्य प्रस्तुत करने की बात पर कोई हलचल दिखाई नहीं दी।
आरोप स्पष्ट तौर पर लगाए गए,तथ्यों को प्रस्तुत करने पर वाद विवाद किए गए।
युवक की बातों ने अनेक सवालों को जन्म दिया है,जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है।
क्या शहर में पत्रकारिता बिकाऊ है?
क्या हर पत्रकार दलाल है?
क्या सच को छिपाने के लिए दो सौ रुपए में सौदा किया जाता है?
भ्रष्टाचारी की महफिल में क्या पत्रकारों की गुप्त मुलाकातें भी होती हैं?
क्या खबर खबर नही दिखावा है?
क्या खबरों की कीमत तय कर दी गई है?
क्या यही वजह है की आंतरिक तौर पर पत्रकार अनेक धड़ों में बटे हुए हैं?
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क्या सस्ती लोकप्रियता के लिए पत्रकारिता पर उंगली उठाई जा रही है?
क्या युवक स्थानीय संरक्षण के चलते दबंगई दिखा रहा है?
क्या युवक द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप सही है या सिर्फ यह हवाबाजी है?
क्या युवक की बातों के पूर्णतः सही होने पर भी सार्वजनिक तौर पर मार पीट का कृत्य गैर कानूनी नही है?
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