सचिव और जीआरएस को चन्दन सिंह लोधी देता है हिस्सा?:गोटेगांव जनपद*
जरा सोचिए, एक तरफ वो लोग हैं जो अपना पसीना बहाकर, मजदूरी करके दो वक्त की रोटी कमाते हैं; और दूसरी तरफ यह व्यवस्था है, जहां कुछ चतुर सुजान लोग मिलकर कागजों पर ही एक नई दुनिया बसा लेते हैं। उस दुनिया में चंदन सिंह लोधी सामान खरीदते हैं, बिल पास होते हैं, पैसे निकलते हैं, और पंचायत के इन तथाकथित 'मालिकों' की तिजोरियां भर जाती हैं।
जरा गौर से पढ़िएगा, क्योंकि यह कहानी किसी फंतासी उपन्यास की नहीं है, बल्कि आपके ही टैक्स के पैसों से चलने वाली पंचायत व्यवस्था की है।
सवाल यह है कि यह चंदन सिंह लोधी आखिर कौन है? क्या यह कोई जादुई इंसान है जो हर पंचायत में प्रकट हो जाता है, या फिर यह भ्रष्टाचार के उस समंदर का सिर्फ एक मुखौटा है, जिसके पीछे छिपे हैं असली शिकारी-सचिव और जीआरएस?
कोरेगांव में 'चंदन सिंह लोधी' को कभी 'दुकानदार' तो कभी 'जनसामान्य' बताकर धड़ल्ले से भुगतान किया गया!
सिलवानी का खेल भी कुछ ऐसा ही है, जहां कागजों पर 'चंदन सिंह लोधी' के नाम से हजारों रुपये के वाउचर काटकर धड़ल्ले से राशि आहरित की गई!
ग्राम पंचायत कुण्डा और मुरदई में भी चंदन सिंह लोधी के नाम पर संदिग्ध बिलों के माध्यम से सरकारी राशि की होली खेली गई!
सचिव की कलम से निकलने वाला हर हस्ताक्षर, जीआरएस की मिलीभगत से इस लूट के साम्राज्य को सींच रहा है!
पंचायतों को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया है। विकास के नाम पर सिर्फ कागजों पर गोलमाल हो रहा है और असली खेल अंदरखाने खेला जा रहा है।
किसकी शह पर सचिव और जीआरएस मिलकर इस सिंडिकेट को चला रहे हैं? क्या जनता का पैसा इन भ्रष्टाचारियों की तिजोरियां भरने के लिए है?
तैयार रहिए, क्योंकि कागजों में दफन यह सच अब बाहर आकर रहेगा, और इस लूट में शामिल हर एक चेहरे को बेनकाब करके छोड़ेगा!
