वीरू का फिक्स 'महीना' और बिका हुआ सिस्टम!-रेड पड़ने से पहले लीक होती है खबर!
ज़रा समझिए इस खेल की गहराई! गांगई और खलगी माई के इलाके से हर रोज 15 से 20 ट्रैक्टर धड़ल्ले से रेत निकाल रहे हैं। और मजे की बात देखिए—रेड पड़ने वाली है, इसकी 'गुप्त सूचना' खनन माफियाओं को पहले ही मिल जाती है!
जब माइनिंग टीम के छापे की खबर लीक होने लगे, तो साफ है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है!
ये हम हवा में तीर नहीं चला रहे। कल सामने आए उस वीडियो ने गंदे तंत्र की सारी परतें उधेड़ कर रख दी हैं।
ये चीख-चीखकर कह रहा है वो वायरल वीडियो, जिसमें खुद एक अवैध खनन करने वाला युवक सिस्टम की पोल खोल रहा है!
वीडियो में यह खुलासा हुआ है कि इस अवैध साम्राज्य को चलाने के लिए 'वीरू' नाम का शख्स अधिकारियों को महीने के फिक्स पैसे पहुंचाता है! यानी रिश्वत दो, नदियों का सीना चीरो और कानून की आंखों में धूल झोंको!
खनन माफियाओं की पहुंच इतनी ऊपर तक है कि माइनिंग टीम की रेड (छापेमारी) पड़ने से पहले ही इसकी सटीक सूचना लीक हो जाती है।
फोन घनघनाते हैं, वॉट्सऐप पर मैसेज दौड़ते हैं और चंद मिनटों में सारे ट्रैक्टर गायब! वाह रे प्रशासनिक ईमानदारी! मतलब चोरों को खुद विभाग ही बता देता है कि बेटा, बच के निकलना!
आखिर गोटेगांव क्षेत्र में यह अवैध रेत खनन का कारोबार किसके इशारे पर और किसकी शह पर फल-फूल रहा है? जब सब कुछ खुलेआम चल रहा है, वीडियो में नाम और तौर-तरीके तक सामने आ चुके हैं, तो फिर जिम्मेदार विभाग और उच्च अधिकारी इस पर आंखें क्यों मूंदकर बैठे हैं?
क्या कुछ खास चेहरों को बचाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया है?
देखना यह होगा कि इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासन आंखें मूंदे रहता है या कोई बड़ा एक्शन लेता है। हमारी नजर इस पर बनी हुई है, बने रहिए हमारे साथ।
