लड्डू चोर पंचायत? सरपंच रश्मि की किससे हो शिकायत?(वाह रे चांवरपाठा की सूकरी पंचायत)
तस्वीरें आपके सामने हैं। जगह है चांवरपाठा की ग्राम पंचायत सूकरी। गाँव के विकास का दावा करने वाले कर्णधारों— सचिव और सरपंच रश्मि पटेल की नुमाइंदगी में पंचायत इन दिनों एक अजीबोगरीब 'चमत्कार' की गवाही दे रही है।
देश भर में झंडावंदन होता है, और उसके बाद बच्चों और नागरिकों में बाँटने के लिए 'लड्डू' खरीदे जाते हैं। अब आप कहेंगे कि इसमें नया क्या है? नया यह है, कि सूकरी पंचायत में लड्डू खाने से ज्यादा, लड्डुओं के 'कागज़' चबाए जा रहे हैं।
ज़रा गौर फरमाइयेगा इस पर्ची पर— दुकान का नाम है 'श्री बिड़ला टी स्टाल एवं जनरल स्टोर्स, कौड़िया'। दुकान चाय और नमकीन बेचती है, चलिए मान लेते हैं कि वहां लड्डू भी मिल जाते हैं। तारीख है 14 अगस्त 2026। सामान है— 25 किलो 'भोग प्रसाद लड्डू' और कुल कीमत है 5250 रुपये।
यहाँ तक सब ठीक था। लोकतंत्र में बिल बनना और उसका भुगतान होना सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन असली सिरदर्द तब शुरू होता है जब आप सरकारी पोर्टल का दरवाजा खटखटाते हैं।
वहाँ जाकर पता चलता है कि एक ही तारीख, एक ही आयोजन और एक ही मात्रा के लिए एक ही दुकान के नाम से मिलते-जुलते रिकॉर्ड या प्रविष्टियाँ तैरने लगती हैं। एक तरफ 'BANSAL GENERAL STORES' तो दूसरी तरफ 'birla tea staal', और EPO नंबर वही— 3985802!
विकास हो न हो, पर सरकारी फंड को मीठा करने में हमारे नुमाइंदे सबसे आगे हैं!
जनता सोचती है कि पंचायत का पैसा विकास में लग रहा है, लेकिन यहाँ तो लगता है कि कागजों में ही लड्डुओं के पहाड़ खड़े किए जा रहे हैं!
सरपंच और सचिव के हस्ताक्षर के साथ सरकारी पोर्टल पर चल रहे इस 'डबल पेमेंट' के खेल की पटकथा कौन लिख रहा है?
अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी पोर्टल और सरकारी खजाने को दोनों हाथों से चूसने का यह नया नुस्खा है? क्या इस 'डबल पेमेंट' के खेल पर जिम्मेदार अधिकारी कोई जांच करेंगे या यह फाइल भी किसी फाइल के नीचे दबी रह जाएगी?
