ग्राम पंचायत बेदू (जनपद गोटेगांव) इस समय भ्रष्टाचार की एक ऐसी भयानक आग में सुलग रही है, जिसे देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। पंचायत की कुर्सी पर बैठे इन चेहरों की भूख अबवानियत की सारी हदें पार कर चुकी है।
मलाईदार कमीशन के गंदे खेल में इंसानियत गिरवी रख दी गई है। आखिर कौन सी ऐसी मजबूरी है या किस बड़े घोटाले का राज छिपा है, जिसके चलते सरपंच पति को सचिव के पैरों में झुकना पड़ रहा है और उनके तलवे चाटने पड़ रहे हैं?
बलराम के सीने में इंसान का दिल नहीं, बल्कि वो भूखा हैवान जाग उठा है जो विकास के नाम पर सीधे जनता की छाती पर मूंग दल रहा है और गरीबों के हक का एक-एक निवाला छीन रहा है?
शिकायतों का सच सामने लाने के बजाय, उन्हें रफा-दफा करने के लिए फर्जी निराकरण का घटिया खेल क्यों खेला जा रहा है?
सीएम हेल्पलाइन पर जब लाचार जनता अपनी जान की फरियाद लेकर पहुँचती है, तो उस दर्द का गला घोंटकर फर्जी निराकरण की साजिश रची जाती है!जनता की चीखों का सौदा करने वाले इन गुनाहगारों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है?
यह सिर्फ एक पंचायत का मामला नहीं है, बल्कि आम इंसान के अधिकारों का कत्ल है।
क्या अंधेर नगरी में इन भ्रष्ट चेहरों का साम्राज्य यूं ही चलता रहेगा, या जनता का यह खौफनाक गुस्सा इन सबको लील जाएगा?
