कलेक्टर रजनी सिंह फिर विवादों के घेरे में
चक्काजाम पर सख्ती के आदेश के बाद जनता पूछ रही है — क्या यही नियम नेताओं के काफिलों पर भी लागू होंगे?
सड़क पर जाम लगाकर विरोध करना अब महंगा पड़ सकता है। जिले में हाल ही में जारी प्रशासनिक आदेश के बाद चक्काजाम को लेकर बहस तेज हो गई है।
कलेक्टर रजनी सिंह के इस आदेश को प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत बता रहा है, लेकिन शहर और गांवों में लोग इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं।
लोगों से बातचीत में एक सवाल बार-बार सुनाई दिया — “क्या ये नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं?”
क्योंकि जब किसान, कर्मचारी या आम लोग सड़क पर उतरते हैं, तो तुरंत कार्रवाई की बात होती है। लेकिन जब नेताओं के काफिले निकलते हैं, तब कई जगहों पर पूरा ट्रैफिक रोक दिया जाता है।
“जनता पांच मिनट रोड रोक दे तो केस बन जाता है, लेकिन नेता लोग निकलते हैं तो आधा घंटा लोग खड़े रहते हैं।”
— बस स्टैंड चौराहे पर मिले एक दुकानदार
प्रशासन का कहना है कि चक्काजाम से एम्बुलेंस, स्कूल बस और जरूरी सेवाएं प्रभावित होती हैं। हाल के कई मामलों में सड़क जाम के दौरान मरीजों और यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी थी।
सड़क दुर्घटनाओं पर क्या तैयारी?
आदेश के बाद अब सड़क सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि अगर प्रशासन सड़क व्यवस्था को लेकर इतना गंभीर है, तो फिर रोज हो रही दुर्घटनाओं पर ठोस कार्रवाई क्यों नजर नहीं आती?
शहर की कई सड़कों पर गड्ढे, ओवरलोड वाहन और तेज रफ्तार अब भी खुलेआम दिखाई देते हैं। हेलमेट और सीट बेल्ट अभियान तो चलते हैं, लेकिन हादसों की असली वजहों पर लगातार कार्रवाई कम ही दिखती है।
लोगों का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए — चाहे आम आदमी हो या नेताओं का काफिला।
फिलहाल आदेश जारी हो चुका है, लेकिन अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन इसे सिर्फ जनता तक सीमित रखता है या व्यवस्था के हर हिस्से पर समान रूप से लागू करता है।
