चलती ट्रेन में बीमार बच्चे का उपचार, लेकिन जागरूकता की कमी आई सामने
दिनांक: 4 मई 2026 | ट्रेन नंबर: 22177 | मार्ग: मुंबई से वाराणसी
ट्रेन नंबर 22177 के कोच S-6, सीट नंबर 58 पर यात्रा कर रही यात्री श्रीमती दीपा यादव के तीन महीने के बच्चे की तबीयत अचानक खराब हो गई।
मामले की सूचना डिप्टी कॉमर्शियल नरसिंहपुर को प्राप्त होते ही, ट्रेन के नरसिंहपुर स्टेशन पहुंचने पर रेलवे चिकित्सक डॉ. आर.आर. कुर्रे ने तत्काल बच्चे की जांच की।
जांच में बच्चे को हाई ग्रेड बुखार एवं पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) पाया गया, जो भीषण गर्मी के कारण था।
चिकित्सक द्वारा बच्चे को तुरंत आवश्यक दवाएं दी गईं, ताकि वह आगे की यात्रा सुरक्षित रूप से कर सके।
साथ ही, मां को बच्चे के लिए पानी और ओआरएस (ORS) भी उपलब्ध कराया गया। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से यात्री ने बच्चे को पानी नहीं देने की बात कहकर ओआरएस वापस कर दिया।
जबकि बच्चे को बुखार और डिहाइड्रेशन की स्थिति में तुरंत पानी और ओआरएस की सख्त जरूरत थी।
अंततः यात्री केवल बुखार की दवा लेकर ही आगे की यात्रा जारी रखीं।
जागरूकता पर सवाल
इतनी भीषण गर्मी में, विशेषकर स्लीपर कोच में यात्रा करते समय, छोटे बच्चों को पानी न देना और ओआरएस जैसी जरूरी चिकित्सा सहायता को ठुकराना गंभीर चिंता का विषय है।
जब चिकित्सक की काउंसलिंग का भी असर नहीं होता, तो यह स्पष्ट होता है कि अभी भी जागरूकता की कमी बनी हुई है।
