धरने का 10वाँ दिन बीत चुका है,अब देखना यह है कि क्या 'आश्वासनों' से पेट भरेगा या फिर सड़क भी बनेगी?
मध्य प्रदेश किसान सभा (बारहा बड़ा) के वार्ड क्रमांक 5 में जारी अनिश्चितकालीन धरने को 10 दिन हो गए हैं। अधिकारी आए, फीता घुमाया, 'एस्टीमेट' का झुनझुना पकड़ाया और चलते बने। पर सवाल यह है कि क्या वह सड़क फाइलों से निकलकर ज़मीन पर भी उतरेगी?
इंजीनियर साहब और CEO जी, नाप-जोख तो हो गई, अब क्या निर्माण शुरू होने के लिए किसी शुभ मुहूर्त का इंतज़ार है?
बिजली विभाग, 'अटल ज्योति' का ट्रांसफार्मर कागजों में तो चमक रहा है, पर वार्ड में अंधेरा क्यों है? क्या बिजली विभाग अब पुतला दहन और घेराव के 'झटकों' का इंतज़ार कर रहा है?
ग्राम पंचायत, आवास योजना और नल-जल का लाभ क्या केवल खास लोगों के लिए है? पाइप लाइन डालना और मंगल भवन की स्वीकृति देना क्या इतना मुश्किल काम है?
संयोजक दिनेश कुशवाहा और जिला समिति सदस्य यदुराज वर्मा ने स्पष्ट कर दिया है—आश्वासनों की खेती अब बंद करो। जब तक काम शुरू नहीं होगा, धरना खत्म नहीं होगा।
अगर शासन-प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई, तो याद रहे: घेराव भी होगा, पुतला भी जलेगा और चक्का जाम भी होगा!
"हर घर से निकल रहा है सैलाब, महिला, पुरुष और बच्चे दे रहे हैं जवाब!"
अब चुप रहने का वक्त नहीं, अपने हक के लिए लडने का वक्त है।
