पंचायत मंत्री की नादिया ग्राम पंचायत के पास आई टाईम मशीन?: अब नरसिंहपुर की पंचायत भविष्य में जाकर कर रही काम!: गोटेगांव
वैसे तो नरसिंहपुर जिले की ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है, लेकिन गोटेगांव जनपद की ग्राम पंचायत नादिया ने तो अब भ्रष्टाचार की परिभाषा ही बदल डाली है!
यहां केवल फर्जी बिल या गड़बड़ी नहीं हो रही, बल्कि अब “समय के साथ खिलवाड़” किया जा रहा है — और वो भी खुलेआम सरकारी पोर्टल पर!
सोचिए ज़रा…
जहां आम आदमी आज की तारीख में काम करवाने के लिए महीनों चक्कर काटता है, वहीं नादिया पंचायत ने भविष्य में जाकर काम करना शुरू कर दिया है!
👉 दिनांक 12/12/2027 का बिल…
👉 और आज की तारीख मार्च 2026…
क्या यह कोई सरकारी योजना है या फिर “भविष्य दर्शन योजना”?
या फिर यह मान लिया जाए कि पंचायत के सरपंच, सचिव और जीआरएस ने मिलकर ऐसी “टाइम मशीन” तैयार कर ली है, जिससे वे आने वाले समय में जाकर बिल बना लाते हैं और आज भुगतान की तैयारी कर लेते हैं!
लेकिन रुकिए…
यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती!
पोर्टल पर जिस बिल की एंट्री 12/12/2027 दिखाई गई है, असल में जो बिल अपलोड किया गया है वह 18/12/2024 का है!
अब सवाल यह उठता है कि—
- 👉 क्या यह तकनीकी गलती है?
- 👉 या जानबूझकर “डेट का खेल” खेला गया है?
- 👉 या फिर यह पूरा मामला फर्जी भुगतान की तैयारी का हिस्सा है?
और सबसे बड़ा सवाल—
- 👉 अगर बिल 2024 का है, तो 2027 की एंट्री क्यों?
- 👉 और अगर 2027 का है, तो 2024 का बिल क्यों अपलोड?
स्पष्ट है कि यहां कुछ न कुछ छिपाने की कोशिश की जा रही है!
इतना ही नहीं…
मुकेश चढ़ार (लघु दुकानदार) के नाम पर 14580 रुपये का यह मामला तो सिर्फ एक झलक है!
सूत्रों की मानें तो—
- 🔴 बिल धुंधले और अस्पष्ट अपलोड किए गए
- 🔴 विवरण जानबूझकर छिपाया गया
- 🔴 और भुगतान की प्रक्रिया को “सिस्टम के सहारे” वैध दिखाने की कोशिश की गई
“दिखे कुछ, हो कुछ और… और समझ में कुछ भी न आए!”
अब सवाल यह है कि—
- 👉 क्या जिला पंचायत अधिकारी इस “टाइम मशीन” को देख नहीं पा रहे?
- 👉 क्या कलेक्टर साहब की नजर इस गड़बड़ी तक नहीं पहुंची?
- 👉 या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदी हुई हैं?
क्योंकि अगर यह सब पोर्टल पर खुला दिखाई दे रहा है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
“सिस्टम ही सेट है… और खेल पूरी प्लानिंग से चल रहा है!”
अब देखना यह होगा कि—
- 👉 इस मामले में जांच होती है या नहीं?
- 👉 दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं?
- 👉 या फिर यह खबर भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगी?
क्योंकि यहां मामला सिर्फ 14580 रुपये का नहीं है…
- ⚠️ सरकारी सिस्टम की विश्वसनीयता का
- ⚠️ पारदर्शिता के दावों का
- ⚠️ और उस जनता के भरोसे का, जो हर टैक्स के साथ यह उम्मीद करती है कि उसका पैसा सही जगह खर्च होगा!


