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सत्य और समाज के बीच की कड़ी

क्या सियासी दोस्ती पर भारी पड़ रहा है प्रशासन?

नरसिंहपुर धरना, वी2 मॉल विवाद और सिस्टम पर उठते सवाल


जैसा कि आप लोग जानते हैं कि विगत छह दिनों से अधिक समय से नरसिंहपुर थाने के सामने स्थानीय पत्रकारों द्वारा धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार धरने पर पहुंचे एसडीएम द्वारा कार्यवाही का आश्वासन दिया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी सवालों के घेरे में खड़ी है।

आखिर क्यों बैठे हैं पत्रकार धरने पर?

यह धरना केवल एक विरोध नहीं, बल्कि जनहित की अनदेखी के खिलाफ उठी आवाज है। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। इसी कारण उन्होंने यह कदम उठाया है।

धरना स्थल से आम नागरिकों को भी आह्वान किया गया है कि वे अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखें।

वीडियो में क्या बोले अभय?

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें धरने पर बैठे पत्रकार अभय बानगात्री अपनी बात रखते नजर आ रहे हैं।

अभय का कहना है कि इस सिस्टम में अमीर और गरीब के लिए अलग-अलग नियम चल रहे हैं। जहां एक गरीब को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर नेताओं से जुड़े मामलों में प्रशासन की चुप्पी साफ दिखाई देती है।

"गरीब को योजना नहीं मिलती, लेकिन नेताओं के अवैध काम पर कोई कार्रवाई नहीं होती" – अभय

वी2 मॉल पर क्यों उठ रहे सवाल?

वीडियो में यह भी आरोप लगाया गया कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष द्वारा संचालित वी2 मॉल का निर्माण और संचालन अवैध रूप से किया जा रहा है। इस संबंध में जिला कलेक्टर को शिकायत भी दी गई थी, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

यही वह बिंदु है जहां मामला केवल एक निर्माण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सियासी संबंधों और प्रशासनिक निष्क्रियता की ओर इशारा करता है।

सियासी समीकरण या प्रशासनिक चुप्पी?

अभय द्वारा वीडियो में यह भी कहा गया कि कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एन पी प्रजापति के बीच करीबी संबंध होने के कारण प्रशासन इस मामले में ठोस कार्रवाई करने से बच रहा है।

हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से कार्रवाई लंबित है, उसने सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

प्रमुख मांग क्या है?

जब अभय से उनकी मुख्य मांग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि:

पहले नेताओं के अवैध निर्माण पर कार्रवाई हो, उसके बाद गरीबों की समस्याओं का समाधान किया जाए।

क्या चलेगा बुलडोजर?

वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि प्रशासन इतनी जल्दी किसी बड़े निर्माण पर बुलडोजर चलाएगा। लेकिन सवाल यह है कि अगर कार्रवाई नहीं होगी, तो क्या यह संदेश नहीं जाएगा कि कानून केवल कमजोरों के लिए है?

जिले में भ्रष्टाचार का माहौल?

इस पूरे मामले को यदि व्यापक नजरिए से देखें, तो यह केवल एक मॉल या एक शिकायत का मुद्दा नहीं है। जिले में भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

ग्राम पंचायतों से लेकर शहर तक, गबन और अनियमितताओं की खबरें आम हो चुकी हैं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही नजर आता है।

जब हमाम में सब नंगे हों, तो सवाल यह नहीं कि कौन दोषी है… सवाल यह है कि कार्रवाई करेगा कौन?

अब आगे क्या?

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या एसडीएम का आश्वासन सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा या वास्तव में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?

यह आने वाला समय ही तय करेगा कि यह धरना एक बदलाव की शुरुआत बनेगा या फिर एक और मुद्दा बनकर रह जाएगा।


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