क्या सरपंच को गांव लूटने का पूरा हक है?
रातिकरार (कला) पंचायत में ‘पंचायत घर का पूत कुंवारा बैठा, बाहर फेरे पड़वाए’ जैसे हालात!
करेली जनपद अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रातिकरार (कला) में हालात ऐसे बनते दिखाई दे रहे हैं मानो गांव के अपने मजदूरों पर भरोसा ही नहीं रहा — या फिर पंचायत में कोई अलग ही खेल चल रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मनरेगा कार्यों के लिए गांव के मजदूरों को दरकिनार कर बाहरी गांवों से मजदूर बुलाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि रांकई से शहजाद और कठौतिया से गीतांजलि को मनरेगा मजदूर के रूप में दर्ज किया जा रहा है।
गांव के लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं —
यानी अपने गांव के मजदूर बेरोजगार बैठे हैं और काम दिया जा रहा है बाहर वालों को। यह केवल अनियमितता नहीं बल्कि मनरेगा की मूल भावना पर सीधा हमला माना जा रहा है।
जिला पंचायत अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल
इधर जिला पंचायत अधिकारी गजेंद्र नागेश की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कथित भक्ति और दिखावे से फुर्सत मिले तो पंचायतों में चल रही इन गड़बड़ियों पर भी नजर डाली जाए।
गांव के लोग अब खुलकर कह रहे हैं —
अब उठ रहे बड़े सवाल
- क्या मनरेगा मजदूरों के नाम पर पंचायत में कोई बड़ा खेल चल रहा है?
- क्या स्थानीय मजदूरों को जानबूझकर काम से वंचित किया जा रहा है?
- क्या प्रशासन इस मामले की जांच करेगा?
- या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?
रातिकरार (कला) पंचायत में उठ रहे ये सवाल अब जवाब मांग रहे हैं… और जनता की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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