भैया जी विधायक हो गए?
भैया जी जब से विधायक हुए हैं, आसपास के गांवों में बड़ी हलचल मची हुई है।
कभी शादी-ब्याह में आशीर्वाद देते दिख जाते हैं, कभी जन्मदिन के केक के पास मुस्कुराते मिल जाते हैं, कभी तेरहवीं में संवेदना प्रकट करते हैं, तो कभी कथा-भागवत में भक्ति रस में डूबे दिखाई देते हैं।
कुल मिलाकर भैया जी हर जगह मौजूद हैं… बस एक जगह को छोड़कर — गांव की पंचायत में!
सुना है पंचायत में जाने की जरूरत ही क्या है! मिठाई और संदेश भेज दिया जाता है, और काम समझ लिया जाता है।
उधर गांव की हालत यह है कि सड़कें टूटी हैं, नालियां बजबजा रही हैं, योजनाएं कागज पर दौड़ रही हैं और विकास फाइलों में दम तोड़ रहा है।
लेकिन भैया जी के भाषणों में गांव की बदहाली का कारण बड़ा वैज्ञानिक बताया जाता है —
- कभी विपक्ष की साजिश
- कभी पिछली सरकार की विरासत
- और कभी अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का संकट
मानो गांव की टूटी सड़कें भी अब अंतर्राष्ट्रीय मंदी से प्रभावित हो गई हों!
उधर बगल में उनका चेला शहर में ढिंढोरा पीट रहा है —
“हमारे विधायक जी दिन-रात विकास कर रहे हैं!”
गांव वाले भी अब समझदार हो गए हैं। वे मुस्कुराकर कहते हैं —
“विकास जरूर हो रहा होगा… बस गलती से हमारे गांव का रास्ता भूल गया है।”
और भैया जी भी निश्चिंत हैं, क्योंकि अगला चुनाव आने तक कुछ और शादियां, कुछ और जन्मदिन और कुछ और कथाएं हो ही जाएंगी।
