पंचायत मंत्री के क्षेत्र में गबन का रिकॉर्ड तोड़ खेल?
डबल इंजन सरकार के “अमृतकाल” की सबसे भयावह और खौफनाक तस्वीर
यह कोई सामान्य रिपोर्ट नहीं है।
यह उस सन्नाटे की कहानी है जो फाइलों में कैद है,
और उस चीख़ की जो गांवों में दबा दी गई।
पंचायत मंत्री का क्षेत्र — जहां विकास को उदाहरण बनना था, वहीं आज गबन रिकॉर्ड तोड़ चुका है।
ग्राम पंचायत चांदनखेड़ा हो, रातिकरार कला हो या फिर मोहपानी — हर नाम के साथ एक ही साया चलता है… गबन।
अमृतकाल या भयकाल?
सरकार अमृतकाल का दावा कर रही है, लेकिन इन पंचायतों में बह रहा है डर।
- फाइलें पूरी हैं
- हस्ताक्षर मौजूद हैं
- राशि स्वीकृत है
- काम गायब है
सबसे डरावनी बात यह नहीं कि पैसा गबन हुआ, बल्कि यह है कि सबको सब पता है।
प्रशासन की खामोशी — सबसे बड़ा अपराध
यहां कोई जांच नहीं होती।
यहां कोई कार्यवाही नहीं होती।
शिकायतें आईं, फाइलें खुलीं, सवाल उठे — लेकिन हर बार सच को दबा दिया गया।
न नोटिस, न निलंबन, न एफआईआर।
जब अधिकारियों के मन से कानून का डर खत्म हो जाए
अधिकारियों की आंखों में अब न नियम दिखते हैं, न कानून।
“ऊपर तक सब सेट है” — यही वाक्य इस पूरे तंत्र को सबसे खतरनाक बना देता है।
गबन अब अपराध नहीं, व्यवस्था बन चुका है
यहां गबन कोई चोरी नहीं रहा। यह अब प्रक्रिया बन चुका है।
जब गबन सिस्टम बन जाए, तो ईमानदारी सबसे बड़ा अपराध बन जाती है।
पंचायत मंत्री का क्षेत्र! नाम सुनते ही लोगों को लगता है — यहां तो नियम होंगे, यहां तो निगरानी होगी, यहां तो डर होगा! लेकिन हकीकत? यहां डर खत्म हो चुका है और जहां डर खत्म हो जाए, वहां गबन जन्म लेता है!
सबसे डरावना सवाल
क्या यह संयोग है कि यह सब पंचायत मंत्री के क्षेत्र में ही हो रहा है?
या फिर सत्ता की ताकत सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बन चुकी है?
गांवों में डर का सन्नाटा
ग्रामीण कहते हैं — “बोलेंगे तो फंस जाएंगे।”
जब जनता डर जाए और प्रशासन चुप हो जाए, तब समझ लीजिए लोकतंत्र खतरे में है।
यह लेख नहीं — चेतावनी है
अगर अब भी जांच नहीं हुई,
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई,
तो यह गबन पंचायतों तक सीमित नहीं रहेगा।
यह पूरे सिस्टम को निगल जाएगा।
