चौकसे हॉस्पिटल ही निशाने पर क्यों?
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था सुविधा को लेकर अक्सर एक नाम बार-बार चर्चा में दिखाया जाता है — चौकसे हॉस्पिटल! सवाल यह नहीं कि जांच होनी चाहिए या नहीं… सवाल यह है कि जांच सिर्फ एक ही संस्थान की क्यों?
क्या यह राजनीतिक साजिश है या दबाव की रणनीति?
क्या यह किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है? या फिर यह दबाव बनाकर वसूली का कोई खेल है? आखिर बार-बार उंगली यहीं क्यों उठ रही है?
“जांच होनी चाहिए — लेकिन निष्पक्ष होनी चाहिए। कार्रवाई हो — तो सभी पर समान रूप से हो।”
फीस कम, अनुभव अधिक — फिर सवाल क्यों?
कहा जाता है कि अन्य निजी चिकित्सालयों की तुलना में यहां फीस और अन्य चार्जेस अपेक्षाकृत कम हैं। काफी लोगों का यह भी कहना है कि डॉक्टर अमित चौकसे योग्य और अनुभवी हैं।
तब क्या यह कहना गलत होगा कि लोकप्रियता ही असहजता का कारण बन रही है? क्या प्रतिस्पर्धा को खत्म करने के लिए किसी एक को लगातार निशाना बनाया जा रहा है?
क्या बाकी सब निर्दोष हैं?
क्या जिले के अन्य सभी निजी चिकित्सालय पूरी तरह पारदर्शी हैं? क्या कहीं कोई अनियमितता, कोई शिकायत, कोई सवाल नहीं उठता?
यदि अनियमितताएं हैं — तो कार्रवाई सभी पर होनी चाहिए। यदि नहीं हैं — तो फिर एक ही नाम क्यों बार-बार चर्चा में लाया जा रहा है?
“जब सवाल एकतरफा होते हैं, तो संदेह भी एकतरफा नहीं रहता।”
अब वक्त है पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का। न किसी के पक्ष में, न किसी के विरोध में — बल्कि केवल सच के साथ।
