परीक्षा के दौरान कैसे पढ़ें कि स्ट्रेस से सामना ना हो?
एक छोटी लेकिन सार्थक चर्चा
लेखक पत्रकार विक्रम सिंह राजपूत
इस समय जिन बच्चों की परीक्षाएं चालू हो गई हैं, उनके सामने सबसे बड़ी समस्या यही रहती है कि वे अगले पेपर की तैयारी कैसे करें?
तो आइए, इस पर करते हैं एक छोटी सी सार्थक चर्चा…
देखिए, इस दौरान आप Deep Study करें या फिर Selective, यह समझना बेहद जरूरी है।
अक्सर बच्चे Deep Study पर फोकस करने का प्रयास करते हैं, लेकिन पेपर में कम गैप होने के कारण यह संभव नहीं हो पाता। ऐसे में हताशा और स्ट्रेस होना स्वाभाविक है।
जहां तक मैं अपनी बात करूं, तो मुझे Selective Study Pattern पसंद है। एग्जाम के दौरान यह सबसे मजबूत हथियार साबित हो सकता है।
📌 अब बात सीधी और साफ
परीक्षा के दिनों में “पूरा सिलेबस जीतने” का सपना मत देखिए… इन दिनों का लक्ष्य होना चाहिए – “स्मार्ट रीविजन”, न कि “नया अध्याय जीतना”।
Deep Study उस समय की चीज है जब आपके पास महीनों का समय हो। लेकिन पेपर के बीच में 1–2 दिन का गैप हो, तब दिमाग को योद्धा नहीं, रणनीतिकार बनाइए।
🎯 Selective Study Pattern कैसे अपनाएं?
1. पहले पिछले प्रश्नपत्र देखें
किस टॉपिक से बार-बार सवाल आते हैं, उसे चिन्हित करें। परीक्षा में “पैटर्न” ही असली खेल है।
2. 80/20 नियम अपनाएं
सिलेबस का 20% हिस्सा अक्सर 80% नंबर दिला देता है। उसी 20% को पकड़ लीजिए।
3. छोटे-छोटे टारगेट बनाएं
3 घंटे में पूरी किताब नहीं, लेकिन 3 घंटे में 3 महत्वपूर्ण टॉपिक जरूर खत्म हो सकते हैं।
4. रात भर जागना बंद करें
नींद की कमी सबसे बड़ा स्ट्रेस फैक्टर है। थका हुआ दिमाग पढ़ता नहीं, बस पन्ने पलटता है।
🧠 स्ट्रेस क्यों आता है?
स्ट्रेस पढ़ाई से नहीं आता। स्ट्रेस “तुलना” से आता है।
जब दोस्त कहे – “मैंने पूरा सिलेबस कर लिया…” और आपका आधा भी बाकी हो, तब घबराहट शुरू होती है।
लेकिन याद रखिए — परीक्षा में सब कुछ नहीं, सही चीज लिखना जरूरी होता है।
✍️ आखिरी दिन की रणनीति
- नई चीज बिल्कुल न शुरू करें।
- अपने नोट्स दोहराएं।
- महत्वपूर्ण परिभाषाएं, सूत्र, तिथियां दोबारा देखें।
- 30 मिनट हल्की वॉक या प्राणायाम करें।
दिमाग को आराम देंगे तो वही दिमाग आपको नंबर देगा।
🌿 निष्कर्ष
परीक्षा युद्ध नहीं है। यह आपकी तैयारी की समीक्षा है।
Deep Study सम्मानजनक है, लेकिन Exam Time में Selective Study समझदारी है।
शांत दिमाग, स्पष्ट रणनीति और संतुलित आत्मविश्वास — यही असली टॉपर मंत्र है।
परीक्षा अंक तय करती है, लेकिन संयम व्यक्तित्व तय करता है। और व्यक्तित्व… वही आपको जीवन की बड़ी परीक्षाओं में जीत दिलाता है।
