🔥 रमपुरा ग्राम पंचायत में डाटा से खिलवाड़ और बिलों में खेल?
आखिर प्रशासन किसके साथ — जनता के या गड़बड़ियों के?
रमपुरा ग्राम पंचायत में सामने आ रहे आरोप कोई मामूली प्रशासनिक त्रुटि नहीं हैं, बल्कि यह सीधे-सीधे जनता के विश्वास पर हमला माने जा रहे हैं।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार ग्राम रोजगार सहायक (जीआरएस) द्वारा शासकीय पोर्टल पर अपलोड किए गए डाटा में संदिग्ध छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही है, वहीं पंचायत सचिव पर बिलों में हेरफेर कर वित्तीय अनियमितता करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
यदि यह आरोप सही हैं, तो क्या पंचायत को लूट का अड्डा बना दिया गया है?
⚠️ डाटा में छेड़छाड़ — तकनीकी गलती या सुनियोजित खेल?
सरकारी पोर्टल पर अपलोड किया गया प्रत्येक आंकड़ा भविष्य में ऑडिट, भुगतान और जवाबदेही का आधार होता है। ऐसे में यदि डाटा स्तर पर छेड़छाड़ की गई है, तो यह केवल एक कर्मचारी की गलती नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था को चुनौती है।
क्या संबंधित अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया है? या फिर इसे “जांच जारी है” कहकर ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी है?
💰 बिलों में संदिग्ध हेरफेर — जनता के पैसे से खिलवाड़?
पंचायत सचिव पर आरोप है कि बिलों में कथित हेरफेर कर भुगतान प्रक्रिया को संदिग्ध बनाया गया। यदि यह सिद्ध होता है, तो यह शासकीय धन के दुरुपयोग की गंभीर श्रेणी में आएगा।
क्या सचिव के वित्तीय अधिकारों पर तत्काल रोक लगेगी?
क्या जीआरएस को निलंबित किया जाएगा ताकि जांच निष्पक्ष रह सके?
🚨 प्रशासन की साख दांव पर
यह मामला अब केवल रमपुरा ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं रहा। यह प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही की सीधी परीक्षा बन चुका है।
- सचिव के वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से स्थगित किए जाएं।
- संबंधित जीआरएस को जांच पूर्ण होने तक निलंबित किया जाए।
- स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट कराया जाए।
- जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन सख्ती दिखाता है या चुप्पी साधता है।
रमपुरा की जनता जवाब चाहती है। यदि गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई हो, और यदि आरोप निराधार हैं तो सच्चाई सामने लाई जाए।
पंचायत की तिजोरी जनता की है — और जनता अपने पैसे का हिसाब मांग रही है।
