यह सिर्फ एक सरपंच की पीड़ा नहीं है,
आज की यह खबर सरपंच समुदाय के लिए विशेष मायने रखती है।ओबीसी समुदाय से आनेवाले सरपंच महेंद्र ने अपनी पीढ़ा stringer24News के साथ साझा की।
यह लोकतंत्र के सबसे निचले पायदान पर बैठे चुने हुए प्रतिनिधि की बेइज्जती है।
जिस सरपंच को जनता ने वोट देकर कुर्सी तक पहुँचाया,
उसी सरपंच को यह कहा जा रहा है कि—
“औकात नहीं थी तो सरपंच बने ही क्यों?”
यह सवाल नहीं,
मानसिक हिंसा है।
यह टिप्पणी नहीं,
संवैधानिक पद का अपमान है।
🔴 सवाल यह नहीं कि सरपंच ने पंचायत कक्ष में खुद को बंद क्यों किया
सवाल यह है कि
उसे उस हालात तक पहुँचाया किसने?
सरपंच महेंद्र का आरोप है कि
एई शीतल कौरव ने सवर्ण समुदाय के साथ मिलकर न सिर्फ विभागीय सहयोग से इनकार किया, बल्कि खुले तौर पर सामाजिक दबाव की राजनीति खेलने का सुझाव दिया।
सिरेगांव सरपंच महेंद्र ने बताया कि, एई शीतल कौरव द्वारा लगातार मुझे मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जाता रहा है! विभागीय कार्यों में सहयोगात्मक रुख न अपनाते हुए शीतल कौरव यह कहते हैं कि, गांव के स्वर्ण बड़े लोगों (विरोधियों) से कोआपरेट करके चलो!उन्हें तुम फायदा पहुंचाओगे तो तुम्हे कोई समस्या नहीं होगी!
इतना ही नहीं सरपंच महेंद्र पर मानसिक दबाव बनाने के लिए उन्हें मेसेज किए जाते हैं कि, जब औकात नहीं थी तो फिर सरपंच बने ही क्यों?
“स्वर्ण समाज के बड़े लोगों से कोआपरेट करके चलो,
उन्हें फायदा पहुँचाओ,
फिर देखना कोई परेशानी नहीं होगी!” : एई शीतल कौरव
यह बयान अगर सच है,
तो यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं,
बल्कि जातिगत शक्ति संतुलन थोपने की कोशिश है।
या फिर
कुछ वर्ग विशेष के इशारों पर चलने वाली कठपुतली?
जब एक ओबीसी समुदाय से आने वाला सरपंच
खुलेआम कहे कि उसे मानसिक रूप से तोड़ा जा रहा है,
तो यह सवाल उठना लाज़मी है—
- क्या दलित-पिछड़ा प्रतिनिधि सिर्फ दिखावे के लिए चुने जाते हैं?
- क्या विकास उन्हीं गांवों में होगा, जहाँ “बड़े लोग” खुश हों?
- क्या प्रशासन का काम दबाव बनाना रह गया है?
🔴 अनशन सिर्फ विरोध नहीं, चेतावनी है
सरपंच महेंद्र का अनशन
कोई राजनीतिक ड्रामा नहीं,
यह एक चेतावनी है व्यवस्था के लिए।
यह संदेश है कि
अगर चुना हुआ प्रतिनिधि सुरक्षित नहीं,
तो आम नागरिक की सुरक्षा की बात करना
खुद एक मज़ाक है।
जिला प्रशासन?
जनपद पंचायत?
या फिर वही सिस्टम
जो चुप रहकर सब कुछ होते देख रहा है?
Stringer24News यह सवाल दोहराता है—
क्या सरपंच महेंद्र का कसूर सिर्फ इतना है
कि वह “निचले तबके” से आता है?
अगर आज यह चुप्पी रही,
तो कल हर पंचायत में
यही आग फैलेगी।
