बेदू पंचायत: पैसा ऊपर गया, चुप्पी नीचे फैली — अब गिनती शुरू
ग्राम पंचायत बेदू | विशेष रिपोर्ट
ग्राम पंचायत बेदू में जो सामने आया है, वह कोई साधारण गड़बड़ी नहीं, बल्कि संगठित वसूली तंत्र की पहली खुली परत है।
बाजार नीलामी से प्राप्त सरकारी राशि का विभागीय खाते में जमा न होना और उसका सरपंच पति बलराम के पास से “गायब” हो जाना, यह साफ संकेत देता है कि पंचायत में नियम नहीं, सौदे चल रहे हैं।
सवाल यह नहीं है कि पैसा क्यों नहीं जमा हुआ,
सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम बिना संरक्षण के हज़म कैसे हो गई?
सरपंच सिर्फ नाम, सत्ता पति के पास
बलराम न तो निर्वाचित प्रतिनिधि है, न ही किसी पद पर आसीन। इसके बावजूद वही तय करता दिख रहा है —
- नीलामी की राशि कहाँ जाएगी
- कौन सवाल पूछेगा और कौन चुप रहेगा
- किस फाइल में मामला दबेगा
यह व्यवस्था नहीं, बल्कि सरपंच पद को बंधक बनाकर की गई खुली दलाली है।
यदि सरपंच पूजा को यह सब नहीं पता था —
तो यह अक्षम नेतृत्व है।
और यदि पता था —
तो यह सीधी भागीदारी।
बीच का कोई रास्ता नहीं।
जिसकी चुप्पी है, उसकी हिस्सेदारी है
पंचायत सचिव, लेखा शाखा और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की एकसाथ चुप्पी कोई संयोग नहीं हो सकती।
जब —
- सरकारी राशि जमा नहीं होती
- नियम टूटते दिखते हैं
- और कोई आपत्ति दर्ज नहीं होती
तो निष्कर्ष सीधा है — सिस्टम को हिस्सा मिल चुका है।
अब प्रशासन की परीक्षा
अब तक कोई कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि प्रशासन या तो डर रहा है, या फिर शामिल है।
और दोनों ही स्थितियाँ कुर्सी के लिए खतरनाक हैं।
क्योंकि अब मामला फाइलों में नहीं,
रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है।
Stringer24 News का रिकॉर्ड पर नोटिस
यह लड़ाई बलराम के खिलाफ नहीं,
उस सिस्टम के खिलाफ है
जहाँ सरपंच पति दलाल बन बैठता है
और अधिकारी मूक दर्शक।
Stringer24 News द्वारा जिला कलेक्टर रजनी सिंह एवं जिला पंचायत अधिकारी गजेंद्र नागेश को लिखित शिकायत देकर जांच की मांग की जाएगी।
यदि इसके बाद भी —
- जांच प्रारंभ नहीं होती
- राशि की वसूली नहीं होती
- जिम्मेदारी तय नहीं की जाती
तो अगली रिपोर्ट में यह साफ पूछा जाएगा — किस अधिकारी ने किसके कहने पर आंखें मूंदी।
नाम नहीं लिखे जाएंगे —
नाम अपने आप निकल आएंगे।
