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✍️ संपादकीय

Stringer24 News

गणतंत्र दिवस के मंच पर फूहड़ता?

तिरंगे की छांव में अश्लील ठुमके—यह आज़ादी नहीं, हमारी सामूहिक गिरावट है


हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों से गणतंत्र दिवस समारोह आयोजन के दौरान अश्लील,भौंडे नृत्य प्रदर्शन के वीडियो सोशल मीडिया पर दिखाई दिए।

गणतंत्र दिवस कोई सामान्य आयोजन नहीं है। यह उस संविधान का उत्सव है, जिसने हमें नागरिक बनाया, अधिकार दिए और कर्तव्यों की याद दिलाई।

लेकिन जब इसी पवित्र दिन, देशभक्ति गीतों की आड़ में मंच पर अश्लील नृत्य परोसा जाए, तो यह केवल एक घटना नहीं रहती— यह हमारे समाज के चरित्र का सार्वजनिक एक्स-रे बन जाती है।

जिस मंच से शहीदों की कुर्बानी याद दिलाई जानी थी, वहीं सस्ती तालियों के लिए मर्यादा को नचाया गया।

तिरंगा मंच पर लहरा रहा था, देशभक्ति के बोल गूंज रहे थे— लेकिन कदम देश के लिए नहीं, कैमरे और तालियों की भूख में उठ रहे थे।

🔥 युवा दोषी नहीं, व्यवस्था कटघरे में है

हर बार उंगली युवाओं पर उठा दी जाती है, लेकिन सच्चाई यह है कि युवा वही करता है जो समाज, मंच और व्यवस्था उसे स्वीकार्यता देकर सिखाती है।

जब राष्ट्रीय पर्व पर फूहड़ता को मंच मिलेगा, तो संस्कार की उम्मीद किताबों और भाषणों से कैसे की जाए?

जहां संविधान की प्रस्तावना होनी थी, वहां आइटम नंबर की मानसिकता हावी थी।

😡 आयोजकों की चुप्पी—सबसे बड़ा अपराध

नृत्य करने वाले दिखाई देते हैं, लेकिन मंच पर बैठे आयोजक अक्सर अदृश्य बने रहते हैं।

जिन्होंने कार्यक्रम की अनुमति दी, जिन्होंने प्रस्तुति को पास किया, जिन्होंने तालियों से इस अपमान को वैधता दी—

असल अपराधी वही हैं। क्योंकि कई बार चुप रहना भी सीधा अपराध बन जाता है।

जिस मंच से

👉 संविधान की गरिमा झलकनी चाहिए थी,

👉 शहीदों की कुर्बानी याद दिलाई जानी थी—

उसी मंच पर

❌ कमर की लचक थी,

❌ आंखों की फूहड़ अदाएं थीं,

❌ और तालियों की गूंज में शर्म सिसक रही थी।

⚠️ गणतंत्र दिवस कोई तमाशा नहीं

यह न DJ नाइट है, न ऑर्केस्ट्रा शो, न सस्ती लोकप्रियता बटोरने का मंच।

यह दिन अनुशासन मांगता है, गरिमा चाहता है और जिम्मेदारी का अहसास कराता है।

अगर तिरंगे के नीचे आज फूहड़ता परोसी जाएगी, तो कल संविधान भी मज़ाक बन जाएगा।

🧨 यह लेख नहीं—चेतावनी है

समय रहते समाज, प्रशासन और आयोजकों को तय करना होगा—

क्या हमें जिम्मेदार नागरिक चाहिए या तालियों पर नाचता हुआ संवेदनहीन समाज?

इतिहास यह नहीं पूछेगा कि आपने क्या देखा, वह पूछेगा— जब तिरंगा शर्मिंदा हो रहा था, तब आप चुप क्यों थे?

© Stringer24 News | सत्य और समाज के बीच की कड़ी

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