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सत्य और समाज के बीच की कड़ी

बरमान थप्पड़ कांड जब वीडियो बोले, नाम चुप रहे और शक ज़ोर से हँसे

बरमान थप्पड़ कांड ने हाल ही में एक बार फिर करवट ली है—और इस बार थप्पड़ ज़मीन पर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की स्क्रीन पर गूंजता दिखाई दिया।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें स्थानीय पत्रकार अभय बानगात्री यह बताते नज़र आए कि पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर बरमान मेला बिगाड़ने की साजिश और IAS अधिकारी के विरुद्ध सोशल मीडिया दुष्प्रचार की जांच एवं कार्यवाही की मांग की गई है।

आरोप हैं, चिंताएँ हैं, आशंकाएँ हैं— पर नाम अब भी गुप्त हैं।

वीडियो में यह भी कहा गया कि कुछ “कथित असामाजिक तत्व” दुर्भावनापूर्ण इरादे से प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध एकतरफा और अप्रमाणित सामग्री प्रसारित कर रहे हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वे तत्व कौन हैं— चेहरे धुंधले हैं, लेकिन आरोप पूरी तरह फोकस में।

ज्ञापन में जनसंपर्क विभाग नरसिंहपुर से उन सभी पत्रकारों एवं अन्य व्यक्तियों की जानकारी मांगने की बात कही गई है, जिन्होंने बिना तथ्यात्मक पुष्टि के खबरें और वीडियो साझा किए। साथ ही सोशल मीडिया के दुरुपयोग के मामलों में आईटी एक्ट के तहत सख़्त कार्रवाई की मांग भी रखी गई है।

स्टिंग वीडियो, सवाल और समय का संयोग

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के विरुद्ध वायरल हुए तथाकथित “स्टिंग वीडियो” को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ज्ञापन में मांग की गई है कि इस वीडियो की सूक्ष्म जांच हो— यह किसने बनाया, किस उद्देश्य से बनाया और किसके कहने पर प्रसारित किया गया।

सवाल यह भी है कि वीडियो सामने आने के बाद सवालों को इतना वक्त क्यों लगा?

वीडियो में बरमान मेला बिगाड़ने की साजिश की बात कहते हुए कांग्रेसी नेताओं की संलिप्तता पर भी संदेह जताया गया है! राजनीति ने भी देर नहीं की थी — तब पूर्व विधायक श्रीमती सुनीता पटेल, मझले भैया, माकपा नेता जगदीश पटेल और रुद्रेश तिवारी ने मामले को गंभीर बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई थी।

इस बीच सोशल मीडिया यूजर्स और प्रिंट व डिजिटल मीडिया पत्रकार लगातार अपडेट साझा करते रहे। क्योंकि जब मामला गर्म हो, तो ठंडा विवेक अक्सर छुट्टी पर चला जाता है।

मीडिया के दो खेमे और एक सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने नरसिंहपुर जिले के मीडिया को दो स्पष्ट खेमों में बाँट दिया है— एक खेमा जो सवाल पूछ रहा है, और दूसरा खेमा जो सवाल पूछने वालों पर ही सवाल उठा रहा है?

सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब घटना बीत जाने के एक सप्ताह बाद यह वीडियो जारी किया गया— ठीक उसी समय, जब मामले से जुड़े पंडित जी और मांझी समाज के युवक अपने बयान बदल चुके थे।

संयोग? या फिर स्क्रिप्ट का अगला सीन?

अभय बानगात्री की कार्यशैली को लेकर भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यूजर्स तरह-तरह की टिप्पणियों के माध्यम से अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं— कोई समर्थन में, कोई विरोध में और कुछ सिर्फ तमाशा देखने आए हैं।

अब देखना यह है कि ऊँट किस करवट बैठता है— और क्या सच्चाई, निष्पक्षता, पारदर्शिता, नैतिकता और जवाबदेही बरमान में सिर्फ काग़ज़ी शब्द बनकर तो नहीं रह जाएँगी?

या फिर… ऊँट भी कैमरे की तरफ देखकर अपना बयान बदल ले।

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