सचिव जानता था, इस तरह हेर-फेर करना आसान हो जाएगा?
ग्राम पंचायत सहावन | सालीचौका | गाडरवारा
नरसिंहपुर जिले की चिचली जनपद अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सहावन में आंगनबाड़ी निर्माण कार्य को लेकर सचिव तेजराम और सरपंच बलबीर पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि दोनों ने निर्माण कार्य में अपने ही नाम से बिल लगाकर भुगतान प्राप्त किया, जो स्पष्ट रूप से हितों के टकराव और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।
कानून क्या कहता है?
पंचायत प्रतिनिधि या पंचायत से जुड़े पदाधिकारी स्वयं सामग्री सप्लायर नहीं बन सकते। यह प्रक्रिया कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। ऐसे मामलों में सरपंच के विरुद्ध पंचायत अधिनियम की धारा 40 के तहत कार्रवाई, दंडात्मक कार्यवाही एवं एफआईआर तक की संभावना बनती है।
इसके बावजूद सचिव तेजराम द्वारा शासकीय नियमों को दरकिनार करते हुए स्व-हित में बिल लगाना और भुगतान लेना गंभीर सवाल खड़े करता है।
खुद के नाम बिल लगाने की नौबत क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पंचायत में तय प्रक्रिया और सप्लायर सिस्टम मौजूद है, तो सचिव और सरपंच को स्वयं के नाम पर बिल लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
इस मामले में सरपंच बलबीर लगातार चुप्पी साधे हुए नजर आए। बार-बार संपर्क करने के बावजूद उनकी ओर से किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
सचिव का पक्ष
“मजदूरों को तुरंत भुगतान करना होता है, इसलिए खुद के नाम से बिल लगाए गए। भुगतान पहले सरपंच को जेब से करना पड़ता है, बाद में उसे एडजस्ट कर लिया जाता है।” — सचिव तेजराम
सच या बहाना?
अब सवाल यह उठता है कि क्या सचिव तेजराम सच बोल रहे हैं, या फिर इसके पीछे पर्दे के पीछे कोई और ही कहानी छुपी हुई है? जब मामले की गहराई से पड़ताल की गई तो चौंकाने वाली संभावनाएं सामने आईं।
ईंट, सेंटिंग और मजदूरी में गोलमाल?
जांच में सामने आया कि ईंट खरीद, सेंटिंग सप्लाई और मजदूरी के नाम पर भुगतान सरपंच बलबीर और सचिव तेजराम द्वारा ही प्राप्त किया गया।
अब यह स्पष्ट होना चाहिए कि — कितने मजदूर थे, उन्हें कब और कितनी राशि दी गई, और बाद में बिल लगाकर किस आधार पर राशि वसूल की गई।
GST प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं?
लाल ईंट, फ्लाई ऐश ईंट और सैंड लाइम ईंट जैसी अधिकांश निर्माण सामग्री पर 12% GST लागू होता है। क्या इन भुगतानों में GST बिल और प्रक्रिया का पालन किया गया, या फिर यहां भी कागजों का खेल खेला गया?
यह मामला केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।
