🔴 गेहूं पर बोनस में 160 रुपए की कटौती
♦️ भाजपा सरकार का किसान विरोधी कदम : माकपा
नरसिंहपुर | मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार पर चुनावी वादों से मुकरने और किसानों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने गेहूं बोनस में की गई कटौती को किसान विरोधी कदम बताया है।
भाजपा की मोहन यादव सरकार न केवल अपने चुनावी वादे से मुकर रही है, बल्कि पहले से संकटग्रस्त कृषि व्यवस्था पर नया आर्थिक बोझ डाल रही है।
माकपा के जिला सचिव जगदीश पटेल ने जारी बयान में कहा कि पेट्रोल-डीजल, खाद, बीज, बिजली और कृषि उपकरणों की लगातार बढ़ती कीमतों से खेती की लागत आसमान छू रही है, ऐसे समय में राज्य सरकार द्वारा गेहूं बोनस में 160 रुपए प्रति क्विंटल की कटौती किसानों की कमर तोड़ने वाली है।
📉 बोनस में भारी कटौती, किसानों को झटका
जगदीश पटेल ने बताया कि पिछले वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपए था, जिस पर राज्य सरकार द्वारा 175 रुपए बोनस दिया जाता था। इस तरह किसानों को कुल 2600 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिला।
इस वर्ष केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी बढ़ाकर 2585 रुपए कर दिया, लेकिन प्रदेश सरकार ने बोनस को 175 रुपए से घटाकर मात्र 15 रुपए कर दिया। नतीजतन किसानों को इस बार भी गेहूं का भाव सिर्फ 2600 रुपए प्रति क्विंटल ही मिलेगा।
पहली बार राज्य सरकार ने बोनस में 91 प्रतिशत तक की कटौती की है, जो अपने आप में ऐतिहासिक और किसान विरोधी फैसला है।
❓ वादों का क्या हुआ?
माकपा नेता ने सवाल उठाया कि यदि सरकार बोनस बढ़ाने की बजाय पिछले वर्ष के बराबर ही 175 रुपए देती, तो इस वर्ष किसानों को गेहूं का भाव 2760 रुपए प्रति क्विंटल मिलता। लेकिन सरकार ने किसानों को राहत देने के बजाय उनसे ही बचत कर ली।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने राज्य सरकार के इस निर्णय को किसान विरोधी करार देते हुए बोनस कटौती को तत्काल वापस लेने और पुनः 175 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने की मांग की है।
जिला सचिव
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, नरसिंहपुर
