कौन अब तक नवाब रजा से फायदा उठा रहा था?
सोशल मीडिया पर दबी जुबान में क्यों चर्चा?
नवाब रजा का नाम आते ही सोशल मीडिया पर तरह-तरह की कानाफूसी शुरू हो जाती है। कहीं आरोपों के तीर चलते हैं, तो कहीं चुप्पी की चादर बिछी नजर आती है। सवाल यह है कि, आखिर ऐसी कौन-सी ताकतें हैं जो अब तक नवाब रजा के नाम और रसूख से फायदा उठाती रहीं, लेकिन आज उन्हीं के होंठ सिल गए हैं?
सोशल मीडिया पर बहस करने वाले कई लोग दबी जुबान में सिर्फ इशारे कर रहे हैं। हिम्मत है, तो खुलकर बोलें — कौन थे वो लोग जो कुर्सी, ठेका, प्रश्रय, वैभव और शक्ति की चाभियां थामे बैठे थे? नवाब रजा के क़रीब रहकर मलाई काटने वाले अब अचानक स्वच्छ छवि का मुलम्मा क्यों चढ़ा रहे हैं?
डर किस बात का?
- क्या लाभ का सिलसिला बंद होने का डर सताता है?
- क्या राजनीति और प्रशासनिक संबंधों के उजागर होने का भय है?
- या फिर सिर्फ समय का फेर है, और सब मौके की प्रतीक्षा में…?
सच्चाई यह है कि, जिसने सालों साथ निभाया, वही आज सवालों से बच रहा है। चुप्पी कभी-कभी सबसे बड़ा सबूत बन जाती है। और यह मौन… किसी आने वाले तूफान का संकेत भी हो सकता है।
समाज की याददाश्त कमजोर सही… लेकिन इतिहास गवाह है — जब सच सामने आता है, तो पर्दे के पीछे छिपे हर चेहरे उजागर होते हैं। अब यह शहर इंतजार में है… कौन बोलेगा सच? और कौन इस दबी जुबान की राजनीति को बेनकाब करेगा?
